कोरबा लक्ष्मणबन तालाब संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान खोने की कगार पर









उग गए हैं खरपतवार
सब तरफ फ़ैली गंदगी
कोरबा शासन-प्रशासन द्वारा तालाबों की संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए योजनाएं भी बनाई गई हैं। इनसब के बावजूद ऐतिहासिक महत्व रखने वाला कोरबा शहर का लक्ष्मणबन तालाब अबतक उपेक्षा का शिकार है। जिम्मेदार अधिकारियो के द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से अब यह तालाब अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच चुका है। मोतीसागर तालाब कोरबा के लिए ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद मायने रखता है। इस तालाब के नाम पर ही तालाब के आसपास बस्ती बस गई, जिसका नाम मोतीसागरपारा पड़ गया।
बताया जाता हैं की इस तालाब का निर्माण कोरबा जमींदारी के तीसरे शासक ने करवाया था। कोरबा के वार्ड नंबर 7 मोतीसागरपारा में स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने तालाब के सामने अपनी पहचान को बचाने का संकट खड़ा हो गया है। कई कारणों से इसकी हालत बद से बदतर हो गई है और ऐसे में आसपास के लोगों को तालाब का उपयोग करने से पहले सोचना पड़ रहा है। जहां-तहां गंदगी के निशान आसानी से देखने को मिल सकते हैं। तालाब में जंगली झाड़ी पूरी तरह से उग आई हैं। क्षेत्र के नागरिक बताते हैं कि काफी समय तक इस तालाब के पानी का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता रहा है, लेकिन समय के साथ कुछ ऐसा हुआ कि तालाब की दुर्गति हो गई।
इसका संरक्षण कैसे हो, इस बारे में प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। लक्ष्मणबन तालाब को लेकर उचित कार्य योजना बनाते हुए कार्य करने की जरूरत है, ताकि तालाब का संरक्षण हो सके। तालाब से कई इतिहास भी जुड़ा हुआ है। जरूरत है तो इसे सहेजने की। स्थिति यही बनी रही तो वह दिन भी दूर नहीं जब यहां से तालाब का नामोनिशान ही मिट जाएगा।






