February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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हसदेव ताप विद्युत परियोजना पश्चिम का राखड़ डेम ग्राम झाबु नवागांव कला ग्राम पंचायत अंतर्गत गरम नहर व हसदेव नदी के समीप राखड़ डेम निर्मित है इस राखड़ डेम में तीन जगह राखड़ फिल्टर प्लांट स्थापित है यहां से राखड़ पानी छनकर बाहर निकलने का रास्ता बना हुआ है जो राखड़ डेम से बाहर निकलकर नदी की तरफ बहाया जाना है इस फिल्टर संयंत्र से बिना फिल्टर किए भारी मात्रा में राखड़ युक्त पानी सीधे नदी पर छोड़ा जा रहा है जो आसपास गांव वाले का निस्तारी इस नदी के पानी से होता है वह इस राखड़ युक्त पानी उपयोग कर कई चर्म रोगों का शिकार हो रहे हैं और स्वास्थ्य से परेशानियां झेलनी पड़ रही है जिसकी जानकारी कई बार प्रबंधन को दिया जा चुका है जिसके बारे में कोई सार्थक पहल नहीं होता ,
निकासी पानी मे राखड़ की मात्रा मापक यंत्र
डेम के बाहर राखड़ पानी निकासी नाले मे बना सेंसर रुम मे लगा है सेंसर

इस संयंत्र का पानी बाहर निकलने के बाद बीच में राखड़ युक्त पानी का मापने के लिए सेंसर लगा हुआ है इस रूम में उसका नियंत्रण बोर्ड व सेंसर के द्वारा राखड़ की मात्रा मापक संयंत्र लगा हुआ है यहां राखड़ युक्त पानी जो डैम से निकला हुआ है उसको इस संयंत्र से प्रवेश कराकर सेंसर के माध्यम से राखड़ कितने मात्रा में है ज्ञात करना रहता है लेकिन इस राखड़ का पानी को इस संयंत्र से अलग प्रवाहित कर संयंत्र में स्थिर साफ पानी का माप लेकर इनकी मापक यंत्र के द्वारा मानक माप विभाग को दिया जा रहा है जो गलत व अमानक जानकारी है इस जगह से बिना माप का राखड़ युक्त पानी बहाया जा रहा है
हवा मे राखड़ मापक यंत्र
आर डी एस(रिस्पान्सेबल डस्ट सेम्पलर )
इसके अलावा हवा में कितनी मात्रा में राखड़ है इसके भी मापने के लिए राखड़ डेम के किनारे ऑफिस में आर सी एस रिस्पांसेबल डस्ट सेम्पलर संयंत्र स्थापित किया हुआ है इस संयंत्र से हवा में कितनी मात्रा में राखड़ है ,इसकी जानकारी इस मापक यंत्र से प्राप्त होता है जिसका दो माह से अभी तक इसका परिचालन नहीं किया गया है और प्रतिदिन अनुमानित मापक जानकारी विभाग को प्रेषित किया जा रहा है इसके अलावा 11 नंबर कन्वेयर बेल्ट में भी यह संयंत्र रखा गया है यहां से भी इसकी प्रदूषण का जांच कर विभाग को भेजना रहता है यहां अधिकारियों से संपर्क किए जाने पर यह बात सामने आया की दो महीना से अभी तक कोई इस संयंत्र को चलाने के लिए कोई कर्मी नहीं आए हैं और यह मशीन स्टोर रूम में धूल खाते कबाड़ जैसे पड़ा हुआ है इन सब की जानकारी पर्यावरण विभाग को मौखिक तौर पर दिया जा रहा है जो आम जनता की स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर पर्यावरण को भ्रामक जानकारी देकर इस विभाग के द्वारा पर्यावरण संरक्षण नियम का घोर उल्लंघन किया जा रहा है जो नियम विरुद्ध व गलत है।

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