1984 के सिख नरसंहार की बरसी पर कांग्रेस का प्रदर्शन बना संवेदनहीनता का सवाल, नंदन जैन ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को घेरा
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‘सिख समाज के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उसी दिन राजनीतिक प्रदर्शन क्यों?’ नंदन जैन ने पूछा—क्या तारीख का चयन महज संयोग है या पीड़ितों की भावनाओं की अनदेखी?
रायपुर। 1984 के सिख नरसंहार की बरसी और दिल्ली में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं छत्तीसगढ़ भाजपा उपाध्यक्ष नंदन जैन ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सिख समाज की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता का परिचायक बताया है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी से सवाल किया कि आखिर विरोध प्रदर्शन के लिए 1 नवंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? क्या यह महज संयोग है या फिर उस दर्दनाक इतिहास से जुड़ी भावनाओं की अनदेखी?
नंदन जैन ने कहा कि 1 नवंबर 1984 भारतीय इतिहास का वह दुखद अध्याय है, जिसे देश कभी भुला नहीं सकता। तत्कालीन घटनाओं में हजारों सिखों की जान गई और असंख्य परिवारों को ऐसी पीड़ा झेलनी पड़ी, जिसके निशान आज भी उनके जीवन में मौजूद हैं। सिख समाज के लिए यह तारीख केवल कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि अपनों को खोने की पीड़ा, अन्याय और संघर्ष की याद दिलाने वाला दिन है।
उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील तारीख पर कांग्रेस द्वारा दिल्ली में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन आयोजित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय सामाजिक भावनाओं और ऐतिहासिक घटनाओं की गंभीरता का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।
भाजपा नेता ने 1984 की हिंसा को लेकर कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगे गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस त्रासदी से जुड़े सवाल आज भी देश के सामने हैं। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के विवादित बयानों, विशेषकर ‘हुआ तो हुआ’ टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बयान पीड़ित परिवारों की पीड़ा को और गहरा करते हैं।
नंदन जैन ने राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से सवाल किया कि क्या विरोध प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी तारीख उपलब्ध नहीं थी? क्या कांग्रेस नेतृत्व को इस बात का अहसास नहीं था कि 1 नवंबर का दिन सिख समाज के लिए कितना संवेदनशील है? उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोध और आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन इतिहास के दर्दनाक अध्यायों से जुड़ी तारीखों पर संवेदनशीलता दिखाना राजनीतिक दलों की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि सिख समाज के दर्द और बलिदान को राजनीतिक स्वार्थ के लिए नजरअंदाज करना उचित नहीं है। यदि कांग्रेस इसी तरह संवेदनशील मुद्दों पर असंवेदनशील रवैया अपनाती रही, तो सिख समुदाय सहित देश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
नंदन जैन के इस बयान ने एक बार फिर 1984 की त्रासदी, कांग्रेस की ऐतिहासिक जिम्मेदारी और राजनीतिक दलों की संवेदनशीलता को लेकर बहस तेज कर दी है।
