छत्तीसगढ़ की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत ही हमारी असली पहचान : जितेंद्र सारथी
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राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का किया आह्वान
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जितेंद्र सारथी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान यहां की समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक संपदा और आपसी भाईचारे में समाहित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 33 जिले अपनी विशिष्ट बोली, खानपान, रहन-सहन और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाते हैं। विशेष रूप से बस्तर की जनजातीय संस्कृति, विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा, लोकनृत्य, मड़ई मेले और मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान हैं।
जितेंद्र सारथी ने कहा कि विकास के साथ अपनी भाषा, लोककला, परंपराओं और जल, जंगल, जमीन का संरक्षण करना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने तथा वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों से एक विकसित, समृद्ध, खुशहाल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी विविधता में एकता ही प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है।
जय जोहार! जय छत्तीसगढ़ महतारी!
