कार्तिक मास में खान-पान की जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी! नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताया क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी
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मूली, आंवला और जिमीकंद को बताया हितकारी, छाछ एवं दाल से परहेज की दी सलाह; बदलते मौसम में आहार-विहार और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। भारतीय आयुर्वेद परंपरा में हर महीने के लिए अलग-अलग आहार-विहार और दिनचर्या का महत्व बताया गया है। बदलते मौसम के साथ खान-पान में आवश्यक बदलाव करना स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में कार्तिक मास को लेकर छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने विशेष खान-पान और जीवनशैली संबंधी जानकारी साझा की है।
डॉ. शर्मा के अनुसार हिंदी पंचांग का कार्तिक मास 27 अक्टूबर से 24 नवंबर 2026 तक रहेगा। इस दौरान मौसम में बदलाव और आसमान साफ होने के कारण आयुर्वेद में पित्त दोष बढ़ने की स्थिति बताई गई है। ऐसे में पित्तशामक, पौष्टिक, हल्के और शरीर को ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
मूली, आंवला और जिमीकंद को दें आहार में स्थान
डॉ. शर्मा ने बताया कि कार्तिक मास में विशेष रूप से मूली और आंवले का सेवन हितकारी माना गया है। इसके अलावा कद्दू, परवल, लौकी, नारियल तेल, देशी गाय का घी, मक्खन, दूध, देशी मिश्री, खांड, मुरब्बा, गुलकंद, मुनक्का, किशमिश, च्यवनप्राश और जिमीकंद को भी आहार में शामिल करने की सलाह दी है।
उन्होंने दीपावली से जुड़ी पारंपरिक कहावत का उल्लेख करते हुए जिमीकंद के सेवन की विशेष महत्ता बताई।
छाछ और दाल सहित इन खाद्य पदार्थों से परहेज की सलाह
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. शर्मा के अनुसार कार्तिक मास में मट्ठा (छाछ) और दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही अधिक खट्टे, नमकीन और तीखे स्वाद वाले खाद्य पदार्थों, ज्यादा तेल-मिर्च-मसाले, बैंगन, काचरा, ककड़ी, पपीता, तरबूज, खरबूजा, लौंग, इमली, रिफाइंड तेल, वनस्पति घी, पनीर, बासी भोजन और अचार से दूरी रखने की सलाह दी गई है।
दिनचर्या में भी करें जरूरी बदलाव
डॉ. शर्मा ने बताया कि कार्तिक मास में केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि दिनचर्या पर भी ध्यान देना चाहिए। इस दौरान धूप, ओस और पूर्वी हवाओं के सीधे संपर्क से बचने, दिन में सोने, भूख के बिना भोजन करने तथा अत्यधिक व्यायाम से परहेज करने की सलाह दी गई है। समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना भी अच्छी दिनचर्या का हिस्सा बताया गया है।
कार्तिक मास की पारंपरिक सीख
डॉ. नागेंद्र शर्मा ने कार्तिक मास की आहार परंपरा को इन पंक्तियों के माध्यम से भी समझाया है—
कार्तिक में न दाल खाना, न मही, दिन में सोना भी नहीं।
आंवला और मूली खाना, जल्दी सोना व उठना ही सही।।
उन्होंने कहा कि भारतीय ऋतुचर्या की परंपरा में मौसम के अनुरूप खान-पान और रहन-सहन को विशेष महत्व दिया गया है। हालांकि, आहार संबंधी बदलाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक आवश्यकताओं के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से ही करने चाहिए।
