बैलेट पेपर की मांग करने वाली कांग्रेस को बैलेट से हुए चुनाव में भी नहीं मिली एक भी सीट : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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ईवीएम पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस के सामने अब आत्ममंथन की चुनौती, मुख्यमंत्री ने कहा—चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास जरूरी, केवल आरोपों से नहीं मिलती जीत
रायपुर, 28 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो कांग्रेस बार-बार ईवीएम पर सवाल उठाती रही है, उसे बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। मुख्यमंत्री ने इसे कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस चुनाव में हार के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, लेकिन जब बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं, तब भी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती। ऐसे में कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपनी चुनावी विफलताओं की जिम्मेदारी कब स्वीकार करेगी। चुनाव ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से, जनता का विश्वास ही जीत का आधार होता है।
कर्नाटक में सरकार होने के बावजूद सीट नहीं मिलने पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच अपने काम और राजनीतिक समर्थन का आकलन करने की जरूरत है, तब कांग्रेस अपनी हार से क्या सबक लेगी?
साय ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है। किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव परिणामों का विश्लेषण करना चाहिए और अपनी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। बार-बार मतदान प्रणाली को कठघरे में खड़ा करने से राजनीतिक जवाबदेही की जरूरत खत्म नहीं हो जाती।
ईवीएम हो या बैलेट पेपर, जनता का भरोसा ही निर्णायक
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाजी और राजनीतिक शोर-शराबा पर्याप्त नहीं है। जनता का विश्वास हासिल करना, उसके मुद्दों को समझना और अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह चुनावी हार के कारणों पर गंभीरता से विचार करे।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद बैलेट पेपर बनाम ईवीएम को लेकर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है। उनके वक्तव्य का केंद्रीय संदेश यही है कि मतदान का माध्यम चाहे कोई भी हो, चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करते हुए आत्ममंथन करना चाहिए।
