कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ कलगामार में ग्रामीणों का हुंकार, जमीन देने से साफ इनकार!
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दर्जनों गांवों की महिलाओं ने संभाला मोर्चा, सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी में उठा जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प; ग्रामीणों का दोटूक सवाल—हमारी जमीन पर फैसला हमारी सहमति के बिना कैसे?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। कोयले की नीलामी और खनन की प्रस्तावित गतिविधियों को लेकर कोरबा जिले के करतला क्षेत्र में ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर मुखर हो उठा है। ग्राम कलगामार में दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी जमीन और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। इस बैठक में सैकड़ों महिलाओं की भागीदारी ने साफ कर दिया कि कोल ब्लॉक का मामला अब केवल जमीन के स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती-किसानी, परिवारों की आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।
ग्रामीणों का स्पष्ट रुख है कि वे अपनी जमीन को कोयला खनन के लिए देने के पक्ष में नहीं हैं। बैठक में जमीन बचाने की चिंता प्रमुखता से सामने आई। ग्रामीणों की आशंकाओं और विरोध के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी मांगों, अधिकारों और सहमति को प्रस्तावित कोल ब्लॉक की प्रक्रिया में कितनी गंभीरता से सुना जाएगा।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी, जमीन बचाने की लड़ाई में परिवारों के भविष्य का सवाल
कलगामार की बैठक में सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक महत्व दिया। महिलाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि जमीन और खनन को लेकर उठ रही चिंताएं केवल खेतों या संपत्ति तक सीमित नहीं हैं। गांवों में परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी, खेती-किसानी, स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता और बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों के लिए जमीन केवल खरीद-बिक्री की वस्तु नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी आजीविका और सामाजिक जीवन का आधार है। ऐसे में कोल ब्लॉक के लिए जमीन उपलब्ध कराने का सवाल उनके लिए बेहद संवेदनशील है। ग्रामीण चाहते हैं कि उनके भविष्य से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी बात को अनदेखा न किया जाए और स्थानीय लोगों के अधिकारों तथा वास्तविक चिंताओं पर स्पष्ट जवाब दिया जाए।
जमीन नहीं देने पर अडिग ग्रामीण, सहमति और अधिकारों पर मांगा जवाब
कोल ब्लॉक नीलामी के विरोध में ग्रामीणों का एक साथ जुटना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में जमीन की सुरक्षा को लेकर असहमति गंभीर रूप ले रही है। ग्रामीणों की प्रमुख चिंता यह है कि यदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां शुरू होती हैं, तो इसका उनकी जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और जीवनशैली पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
ग्रामीणों का रुख स्पष्ट है कि उनकी जमीन और भविष्य से जुड़े फैसलों में उनकी आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ऐसे में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने चुनौती है कि वे ग्रामीणों की चिंताओं को सुनें, प्रस्तावित प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करें और जमीन, अधिकारों तथा सहमति से जुड़े सवालों पर पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराएं।
जल, जंगल और जमीन पर संकट की आशंका, पहले भी हो चुका है विरोध
कोरबा जिले के करतला क्षेत्र में प्रस्तावित कोल ब्लॉकों को लेकर पहले भी ग्रामीणों का विरोध सामने आ चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में चचिया चौक पर लगभग एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों ने कोल ब्लॉक नीलामी के विरोध में प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उठाई गई थीं।
कलगामार में हुई बैठक को इसी व्यापक चिंता के संदर्भ में देखा जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि खनन गतिविधियों के विस्तार से उनकी आजीविका और आसपास के प्राकृतिक संसाधनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, संभावित प्रभावों की वास्तविक स्थिति संबंधित परियोजना के विवरण, पर्यावरणीय आकलन और आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।

अब प्रशासन की जवाबदेही—ग्रामीणों की आशंकाओं का समाधान कब?
कलगामार में दर्जनों गांवों के लोगों की एकजुटता के बाद अब निगाहें प्रशासन और कोल ब्लॉक से जुड़ी संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाएंगे? जमीन से जुड़े अधिकारों और सहमति की प्रक्रिया क्या होगी? प्रस्तावित खनन से प्रभावित होने की आशंका वाले गांवों के भविष्य को लेकर क्या स्पष्ट जानकारी दी जाएगी?
ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ग्रामीणों को मिलना चाहिए। किसी भी विकास परियोजना पर चर्चा केवल संभावित उत्पादन और आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रह सकती; उसके साथ स्थानीय समुदायों के अधिकारों, आजीविका, पर्यावरणीय प्रभावों और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी स्पष्टता जरूरी है।
कलगामार की बैठक ने कोल ब्लॉक नीलामी से जुड़े विरोध को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ग्रामीणों का जमीन नहीं देने का रुख और महिलाओं की बड़ी भागीदारी इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी ग्रामीणों की बात सुनकर उनकी चिंताओं का समाधान किस तरह करते हैं और प्रस्तावित कोल ब्लॉक की आगे की प्रक्रिया में उनकी आपत्तियों पर क्या कार्रवाई होती है।
