डेढ़ घंटे के धैर्य ने बचाई दो अहिराज की जान, प्रजनन के दौरान घर में दिखा दुर्लभ नजारा; जितेंद्र सारथी ने सूझबूझ से किया सुरक्षित रेस्क्यू
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कोरबा में वन्यजीव संरक्षण की मिसाल: जल्दबाजी से बचने के लिए किया इंतजार, प्राकृतिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों सांपों को जंगल में छोड़ा गया
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। प्रकृति के संसार में कई ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जो इंसान को वन्यजीवों के जीवन और उनके संरक्षण का महत्व समझाते हैं। कोरबा के दादर क्षेत्र में मंगलवार की रात ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जब एक घर में एक साथ दो अहिराज सांप दिखाई दिए। दोनों सांपों को देखकर परिवार के लोग घबरा गए और तत्काल वन विभाग तथा नोवा नेचर की वन्यजीव बचाव टीम को सूचना दी। मौके पर पहुंचे रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी ने स्थिति का निरीक्षण किया तो पता चला कि दोनों सांप प्रजनन अवस्था में हैं। इसके बाद उन्होंने जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय धैर्य और सावधानी से काम लेने का निर्णय लिया।
जब रेस्क्यू से पहले जरूरी था इंतजार
रात करीब 8:30 बजे मिली सूचना के बाद जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार को समझाया कि वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों के दौरान अनावश्यक हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। इसलिए दोनों सांपों को जबरन अलग करने के बजाय उनके स्वाभाविक रूप से अलग होने का इंतजार किया गया। यह फैसला न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा, बल्कि मौके पर मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था।
करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद जब दोनों सांप स्वाभाविक रूप से अलग हुए, तब जितेंद्र सारथी ने एक-एक कर दोनों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। वन विभाग के उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के बाद दोनों सांपों को उनके प्राकृतिक रहवास वाले जंगल में छोड़ दिया गया।
काली-पीली धारियों वाला अहिराज, जितना आकर्षक उतना ही विषैला
जितेंद्र सारथी के अनुसार, अहिराज को अंग्रेजी में बैंडेड क्रेट (Banded Krait) कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Bungarus fasciatus है। शरीर पर चमकदार काली और पीली धारियां इसे अलग पहचान देती हैं। यह अत्यंत विषैला सांप है और मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है। सामान्यतः यह मनुष्यों से दूरी बनाए रखने की प्रवृत्ति रखता है।
प्रजनन अवस्था में एक साथ दो अहिराज सांपों का दिखाई देना आम लोगों के लिए असामान्य अनुभव हो सकता है। ऐसे समय में घबराहट या जल्दबाजी के बजाय प्रशिक्षित विशेषज्ञों की सहायता लेना बेहद जरूरी होता है। इस घटना में भी धैर्यपूर्ण इंतजार और सावधानी के साथ किया गया रेस्क्यू वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण का उदाहरण बना।

एक संदेश—सांप दिखे तो दूरी बनाएं, विशेषज्ञों को बुलाएं
इस घटना के बाद जितेंद्र सारथी ने लोगों से अपील की कि घर, आंगन या आसपास सांप दिखाई देने पर उसे मारने, छेड़ने अथवा स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें। विशेष रूप से विषैले सांपों के मामले में अनजान व्यक्ति का हस्तक्षेप जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखें और वन विभाग या प्रशिक्षित वन्यजीव बचाव दल को सूचना दें।
दादर क्षेत्र की यह घटना बताती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी प्राकृतिक गतिविधियों को समझना, अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना और हर परिस्थिति में सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। जितेंद्र सारथी की सूझबूझ और धैर्य ने इस रेस्क्यू को सुरक्षित ढंग से पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।
संपर्क: नोवा नेचर वन्यजीव बचाव दल।
