वनांचल के गांवों तक बस सेवा, जाति प्रमाण पत्र की बाधाएं दूर करने की मांग; आदिवासी शक्तिपीठ ने अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के समक्ष उठाए अहम मुद्दे
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आयोग अध्यक्ष रूप सिंह मण्डावी और उपाध्यक्ष एम.डी. ठाकुर से प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट, ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण के लिए शासन स्तर पर पहल का मिला आश्वासन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। आदिवासी समाज की समस्याओं के समाधान, सुदूर वनांचल क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा और मात्रात्मक त्रुटियों के कारण जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही परेशानियों को दूर करने की मांग को लेकर आदिवासी शक्तिपीठ के प्रतिनिधिमंडल ने महत्वपूर्ण पहल की। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के वीआईपी गेस्ट हाउस, कोरबा में अल्प प्रवास पर पहुंचे छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री रूप सिंह मण्डावी तथा आयोग के उपाध्यक्ष एम.डी. ठाकुर से प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए उनके निराकरण के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया गया।

वनांचल के गांवों को मिले सीधी बस सेवा का लाभ
बैठक के दौरान सुदूर वनांचल के ग्राम देवपुरी, सोनारी, जाम, भाटा सहित अन्य गांवों में आवागमन की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को आज भी आवागमन के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। बस सेवा की कमी के कारण ग्रामीणों को कोरबा आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसका असर उनके दैनिक कार्यों, आवश्यक जरूरतों और शहर तक पहुंचने की सुविधा पर पड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल ने इन गांवों के ग्रामीणों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए कोरबा से सीधे अतिरिक्त बस सेवा शुरू कराने की मांग रखी। कहा गया कि वनांचल क्षेत्रों में नियमित और सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी तथा उनका जिला मुख्यालय से संपर्क आसान हो सकेगा।
मात्रात्मक त्रुटियों के कारण जाति प्रमाण पत्र से वंचित समाज की समस्या उठाई
प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समुदाय के उन लोगों की समस्या भी आयोग के अध्यक्ष के संज्ञान में लाई, जो जाति संबंधी अभिलेखों में मात्रात्मक त्रुटियों के कारण जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय को गंभीर बताते हुए शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की, ताकि पात्र लोगों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
जाति प्रमाण पत्र शिक्षा, रोजगार और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में अभिलेखों में मात्रात्मक त्रुटियों के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि इस विषय पर संबंधित विभागों के माध्यम से उचित पहल की जाए, जिससे प्रभावित आदिवासी परिवारों को राहत मिल सके।
समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन
आदिवासी शक्तिपीठ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखे गए विषयों को आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मण्डावी ने ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव मदद करने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि वनांचल क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बढ़ाने और मात्रात्मक त्रुटियों के कारण जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित स्तर पर सकारात्मक पहल होगी।
इस मुलाकात में आदिवासी समाज की जमीनी समस्याओं को शासन और आयोग तक पहुंचाने के साथ उनके व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया गया। अब ग्रामीणों की निगाहें इन मांगों पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
इस अवसर पर आदिवासी शक्तिपीठ के संरक्षक मोहन सिंह प्रधान, कार्यकारी अध्यक्ष रमेश सिरका, कोषाध्यक्ष विक्रम सिंह कंवर, वरिष्ठ सदस्य गेंद लाल सिदार एवं श्री मरावी सहित प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समाज के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल की अपेक्षा व्यक्त की।
