September 22, 2026

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हल्के वजन, बेहतर विद्युत चालकता और पुनर्चक्रण क्षमता के चलते ऊर्जा के नए युग में बढ़ी एल्युमिनियम की अहमियत
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// बालकोनगर, 22 सितंबर 2026। भारत तेजी से औद्योगिक विकास, बढ़ते विद्युतीकरण और रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश के सामने जहां 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने का लक्ष्य है, वहीं बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन नेटवर्क भी आवश्यक हो गए हैं। ऐसे में एक ऐसी धातु तेजी से महत्वपूर्ण बनकर उभरी है, जो बिजली के सफर को उत्पादन केंद्रों से दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है—एल्युमिनियम।
बिजली पैदा करना ऊर्जा व्यवस्था की शुरुआत भर है। असली चुनौती उसे उन स्थानों तक पहुंचाना है, जहां घर, उद्योग, रेलवे, मेट्रो, हवाई परिवहन, डेटा सेंटर और व्यवसाय इसकी जरूरत महसूस करते हैं। बिजली के इसी विशाल नेटवर्क में एल्युमिनियम का उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। हल्का वजन, अच्छी विद्युत चालकता, जंग के प्रति बेहतर प्रतिरोध और पुनर्चक्रण की क्षमता इसे ऊर्जा क्षेत्र के लिए उपयोगी धातु बनाती है।
लंबी दूरी की बिजली आपूर्ति में मजबूत साथी
भारत में सौर और पवन ऊर्जा की अनेक परियोजनाएं ऐसे क्षेत्रों में स्थापित की जा रही हैं, जो प्रमुख शहरों और औद्योगिक केंद्रों से काफी दूर हैं। वहां पैदा होने वाली बिजली को उपभोग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए व्यापक ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत होती है। उत्पादन केंद्र से ट्रांसमिशन स्टेशन और वहां से वितरण नेटवर्क के जरिए घरों और कारखानों तक बिजली पहुंचाने की इस पूरी प्रक्रिया में एल्युमिनियम आधारित कंडक्टर अहम भूमिका निभाते हैं।
ओवरहेड बिजली लाइनों में एल्युमिनियम आधारित कंडक्टर का व्यापक उपयोग होता है। इनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में कम वजन और अच्छी विद्युत चालकता शामिल है। कम वजन के कारण बिजली के टावरों और संबंधित ढांचे पर भार को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, जिससे लंबी दूरी के नेटवर्क के विस्तार में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।
तांबे के मुकाबले कम वजन, इसलिए ट्रांसमिशन में उपयोगी
तांबा विद्युत का बेहतर चालक माना जाता है, लेकिन एल्युमिनियम का वजन काफी कम होता है। समान आयतन के आधार पर एल्युमिनियम की विद्युत चालकता तांबे की लगभग 61 प्रतिशत बताई जाती है। इसके बावजूद कम वजन और अपेक्षाकृत कम लागत जैसे गुण इसे बिजली के लंबी दूरी वाले नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनाते हैं।
हल्के कंडक्टरों के उपयोग से ट्रांसमिशन टावरों पर भार कम रखने, स्थापना से जुड़ी लागत को नियंत्रित करने और दूरदराज के क्षेत्रों तक बिजली नेटवर्क के विस्तार में मदद मिलती है। यही कारण है कि भारत के तेजी से विस्तारित हो रहे ऊर्जा ढांचे में एल्युमिनियम की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सौर ऊर्जा से लेकर पवन ऊर्जा तक व्यापक उपयोग
एल्युमिनियम की उपयोगिता केवल बिजली की तारों तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा प्रणालियों में सोलर पैनलों के फ्रेम और संरचनाओं से लेकर पवन ऊर्जा के विभिन्न घटकों तक इसका इस्तेमाल किया जाता है। ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ एलएनजी सुविधाओं, समुद्री तेल एवं गैस प्लेटफॉर्म, भंडारण प्रणालियों और पाइपलाइन से जुड़े ढांचे में भी एल्युमिनियम की उपयोगिता देखी जाती है।
देश में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के विस्तार के साथ ऊर्जा के उत्पादन और उसके ट्रांसमिशन के बीच मजबूत कड़ी बनाना जरूरी होगा। इस पूरी प्रक्रिया में एल्युमिनियम आधारित उत्पादों की मांग और उपयोगिता महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।
पुनर्चक्रण क्षमता से टिकाऊ विकास को भी मजबूती
एल्युमिनियम की एक प्रमुख विशेषता इसकी पुनर्चक्रण क्षमता है। इसे दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के साथ टिकाऊ विकास पर बढ़ते जोर के बीच यह गुण एल्युमिनियम को और महत्वपूर्ण बनाता है।
बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच बड़ी भूमिका
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ते विद्युतीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग वर्ष 2027 तक हर साल 6.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। देश अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर चुका है।
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य है। इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक होगा।
बालको की एल्युमिनियम श्रृंखला ऊर्जा क्षेत्र को दे रही मजबूती
इस बढ़ती जरूरत के बीच भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) देश की एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता और ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रही है। कंपनी बिलेट्स, वायर रॉड्स, इनगॉट्स और रोल्ड उत्पादों सहित विभिन्न एल्युमिनियम उत्पादों के माध्यम से बिजली ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क, विद्युत बुनियादी ढांचे, रिन्यूएबल एनर्जी प्रणालियों और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को सहयोग देती है।
घरेलू एल्युमिनियम वायर रॉड्स क्षेत्र में लगभग 33 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ बालको की महत्वपूर्ण उपस्थिति बताई गई है। कंपनी की वर्तमान वार्षिक उत्पादन क्षमता 5.75 लाख टन है और इसे बढ़ाकर 10 लाख टन तक करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सूरज की किरणों से ऊर्जा पैदा करने से लेकर पवन की ताकत को बिजली में बदलने और फिर उस बिजली को लंबी दूरी तक घरों एवं उद्योगों तक पहुंचाने तक—एल्युमिनियम भारत के ऊर्जा ढांचे की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। देश जैसे-जैसे स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक विकास और व्यापक विद्युतीकरण की दिशा में आगे बढ़ेगा, ऊर्जा के इस पूरे सफर में एल्युमिनियम की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जाएगी।

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