कोरबा में पहली बार गूंज रहा गणपति महिमा का अमृत स्वर, निहारिका में दस दिवसीय श्री गणेश कथा का भव्य शुभारंभ
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गणेश चतुर्थी पर भक्ति से सराबोर हुआ निहारिका, पंडित देवशरण दुबे ने सुनाई भगवान गणेश के प्राकट्य की दिव्य कथा; आज्ञाकारिता और कर्तव्यनिष्ठा को बताया सफलता की कुंजी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर निहारिका की धरती पर भक्ति और अध्यात्म का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को गणपति भक्ति में डुबो दिया। कोरबा में पहली बार दस दिवसीय श्री गणेश कथा के विशेष आयोजन का भव्य शुभारंभ महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका रोड में हुआ। मंगल कलश यात्रा, दीप प्रज्ज्वलन और भगवान श्री गणेश के जयघोष के बीच शुरू हुई इस कथा ने पहले ही दिन श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण पैदा कर दिया।

निहारिका गणेशोत्सव समिति के तत्वावधान में विश्व कल्याण की मंगल भावना से आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में व्यासपीठ पर सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के संस्थापक एवं मानस मर्मज्ञ पंडित देवशरण दुबे ने अपनी प्रभावशाली और सुमधुर वाणी से भगवान श्री गणेश के प्राकट्य की कथा सुनाई। कथा के आरंभ से लेकर समापन तक श्रद्धालु भक्ति और भावनाओं में डूबे नजर आए।
माता की आज्ञा के लिए अडिग रहे गणेश, इसी कर्तव्यनिष्ठा ने बनाया प्रथम पूजनीय
प्रथम दिवस की कथा में पंडित देवशरण दुबे ने भगवान गणेश के प्राकट्य प्रसंग को केवल धार्मिक कथा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती की आज्ञा के पालन के लिए भगवान गणेश अपने कर्तव्य पर अडिग रहे। परिस्थितियां कैसी भी हों, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भगवान गणेश का चरित्र हमें सिखाता है कि माता-पिता की आज्ञा, गुरुजनों का सम्मान, कर्तव्य के प्रति निष्ठा, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर दृढ़ता व्यक्ति के जीवन को महान बनाती है। यही गुण भगवान गणेश को देवताओं में प्रथम पूजनीय बनाते हैं।
गणेश कथा में छिपा है सफल जीवन का सूत्र
पंडित देवशरण दुबे ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य सफलता की तलाश में अनेक रास्ते खोजता है, लेकिन भगवान गणेश का जीवन बताता है कि बुद्धि के साथ विनम्रता, सामर्थ्य के साथ अनुशासन और अधिकार के साथ कर्तव्यबोध होना जरूरी है। जो व्यक्ति अपने माता-पिता और गुरु का सम्मान करता है तथा अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार रहता है, उसके जीवन में सफलता और सम्मान के रास्ते खुलते हैं।
उन्होंने भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता और विनम्रता का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्य, विवेक और सत्य के साथ उनका सामना करना चाहिए।
जयघोष से गूंज उठा कथा स्थल
कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्री गणेश की महिमा का भावपूर्ण वर्णन हुआ, श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर समय-समय पर “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष गूंजते रहे। दीपों की रोशनी, भक्तिमय वातावरण और गणेश भक्ति के बीच महानदी कॉम्प्लेक्स परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
कथा के समापन पर भगवान श्री गणेश की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
23 सितंबर तक प्रतिदिन बहेगी गणेश कथा की ज्ञान और भक्ति की धारा
निहारिका गणेशोत्सव समिति द्वारा आयोजित यह विशेष दस दिवसीय श्री गणेश कथा 14 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक महानदी कॉम्प्लेक्स परिसर, निहारिका रोड में आयोजित की जा रही है।
समिति ने क्षेत्रवासियों से इस अनूठे आध्यात्मिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। गणपति की कथा, भक्ति का वातावरण और जीवन को नई दिशा देने वाले संदेशों के साथ निहारिका में अगले दस दिनों तक श्रद्धा और अध्यात्म की यह धारा लगातार प्रवाहित होती रहेगी।







