गांवों की तस्वीर बदल रहा बालको, 1.80 लाख लोगों के जीवन में दिखा बदलाव
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खेतों में बढ़ी पैदावार, महिलाओं के हाथों में आया रोजगार, युवाओं को मिला कौशल और बच्चों को बेहतर भविष्य की राह
Tirentra times Korba **//**//** बालकोनगर, 11 सितंबर 2026। विकास की असली तस्वीर तब सामने आती है, जब गांव का किसान मौसम की अनिश्चितता के भरोसे रहने के बजाय सिंचाई के सहारे अतिरिक्त फसल लेने लगे, जब महिलाओं का हुनर परिवार की आय बढ़ाने लगे, जब युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार की राह मिले और जब बच्चों को गांव में ही बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास पहलों ने इसी बदलाव को जमीन पर उतारने की दिशा में व्यापक काम किया है।
वित्तवर्ष 2026 में बालको की विभिन्न सामुदायिक विकास पहलों का लाभ 123 गांवों के करीब 1.80 लाख लोगों तक पहुंचा। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल जैसे क्षेत्रों में किए गए प्रयासों ने ग्रामीण समुदायों की क्षमताओं को मजबूत करने का काम किया। इन पहलों का उद्देश्य केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने विकास की दिशा स्वयं तय कर सकें।
बचपन से रोजगार तक, जीवन के हर पड़ाव पर विकास की पहल
बालको ने सामुदायिक विकास के लिए मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग चरणों की जरूरतों को समझते हुए बचपन से शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक निरंतर सहयोग उपलब्ध कराना है।
इसी क्रम में नंद घरों को बच्चों के अनुकूल आधुनिक सीखने के केंद्रों के रूप में विकसित किया गया। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज किया गया।
सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग केंद्र संचालित किए गए, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को मार्गदर्शन मिला। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ।
पानी पहुंचा तो खेतों में लौटा भरोसा, किसानों ने अपनाई नई खेती
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका को मजबूत करने के लिए ‘मोर जल मोर माटी’ कार्यक्रम के माध्यम से जल सुरक्षा, आधुनिक कृषि और आय के वैकल्पिक स्रोतों को एक साथ जोड़ा गया।
वित्तवर्ष 2026 में यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया। जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को उन्नत बीज, मिट्टी परीक्षण, फसल में कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
इसका असर खेती में भी दिखाई दिया। करीब 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। उत्पादन में लगभग 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा मजबूत होने से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते भी खोले।
हुनर को मिला मंच, 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण; रोजगार से जुड़ने की बढ़ी राह
युवाओं को बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में वेदांता स्किल स्कूल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वित्तवर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा के तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 82 प्रतिशत युवा रोजगार अथवा उद्यमिता से जुड़े।
रोजगार उपलब्ध कराने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क 12 राज्यों तक विस्तारित हुआ। प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी 61 प्रतिशत रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे।
तकनीकी प्रशिक्षण के साथ व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से परिचय, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी सत्र और कर्मचारियों के मार्गदर्शन को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया।
महिलाओं के हाथों में हुनर से आर्थिक फैसलों तक पहुंची आत्मनिर्भरता

महिला सशक्तिकरण को ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए बालको ने ‘उन्नति’ परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया।
वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए। इसके साथ कुल समूहों की संख्या 561 और उनसे जुड़ी महिलाओं की संख्या 6,003 हो गई। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ी हैं।
समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 0.92 करोड़ रुपये हुई। करीब 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा गया, जिसके माध्यम से लगभग 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।
उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अवसर मिला और प्रति महिला करीब 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर बना।
कोसा की परंपरा को बाजार से जोड़ने की पहल
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा कला को नई बाजार व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में ‘कोसाकारी’ पहल की शुरुआत की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया।
‘कोसाकारी’ ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत ने पारंपरिक बुनकरों को बाजार से जोड़ने तथा उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में नई संभावनाएं खोली हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं ने गांवों तक पहुंचाई उपचार की सुविधा
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘आरोग्य’ परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।
65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। इनमें 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच की गई और 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ।
दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों के माध्यम से 70 बस्तियों में पखवाड़ेवार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ लिया।
इसी के साथ नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,290 मरीजों ने सामुदायिक विकास सहायता के तहत उपचार सेवाओं का लाभ लिया। केंद्र में 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार किए गए। यहां मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली भी स्थापित की गई।
सुविधाओं से मजबूत हुआ सामुदायिक जीवन
सामुदायिक विकास में बुनियादी सुविधाओं की भूमिका को भी महत्व दिया गया। वित्तवर्ष 2026 में बालको द्वारा चार सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और दो सामुदायिक मंच बनाए गए, जिनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला।
इन सुविधाओं ने स्वच्छता और आवश्यक बुनियादी जरूरतों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए भी साझा स्थान उपलब्ध कराए।
तीरंदाजी से प्रतिभा को मिला नया लक्ष्य
ग्रामीण और स्कूली बच्चों में खेल प्रतिभा को पहचानने तथा उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए ‘लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम’ शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ते हुए 29 स्कूलों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।

इस दौरान 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई और 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।
आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में दिखाई दे रहा बदलाव
1.80 लाख लोगों तक पहुंच बालको की सामुदायिक विकास यात्रा का बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इस पूरी पहल की वास्तविक तस्वीर उन बदलावों में दिखाई देती है जो लोगों के जीवन में दिखाई दे रहे हैं।
सिंचाई के बाद किसान का दूसरी और तीसरी फसल की ओर बढ़ना, महिलाओं का आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय होना, प्रशिक्षण के बाद युवाओं का रोजगार से जुड़ना, बच्चों को बेहतर शिक्षा एवं पोषण मिलना और ग्रामीण परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बनना—ये बदलाव सामुदायिक विकास को आंकड़ों से निकालकर वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं।
बालको का सामुदायिक विकास मॉडल परियोजनाओं को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित रखने के बजाय समुदाय की क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। उद्देश्य यही है कि सहयोग धीरे-धीरे आत्मविश्वास में बदले, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत बने। इसी सोच के साथ बालको शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, कौशल, खेल और सामुदायिक सुविधाओं के माध्यम से अधिक सक्षम, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में अपनी भागीदारी जारी रखे हुए है।







