11 सितंबर को नीम करौली बाबा की पुण्यतिथि : प्रेम, सेवा और हनुमान भक्ति का संदेश आज भी करोड़ों भक्तों के जीवन में जगाता है आस्था
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53वीं पुण्यतिथि पर महाराज जी का स्मरण, कैंची धाम से वृंदावन तक भक्तों के लिए आज का दिन बेहद खास
Tirentra Time’s Korba **//**//** नई दिल्ली/वृंदावन11सितंबर2026
भारत की आध्यात्मिक परंपरा में नीम करौली बाबा महाराज जी का नाम श्रद्धा, भक्ति, सेवा और प्रेम के साथ लिया जाता है। 11 सितंबर का दिन उनके भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1973 में बाबा ने वृंदावन में शरीर त्याग किया था। वर्ष 2026 में उनकी 53वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
भक्त उन्हें प्रेम से महाराज जी भी कहते हैं। बाबा का जीवन किसी एक संप्रदाय या वर्ग तक सीमित नहीं रहा। उनके संदेश में प्रेम, सेवा, सादगी, ईश्वर-भक्ति और मानवता को विशेष स्थान मिला। आज भी उनके अनुयायी उनके जीवन और शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।
कौन थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा का जन्म नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र में हुआ था। आगे चलकर उन्होंने साधु जीवन अपनाया और देश के विभिन्न स्थानों पर आध्यात्मिक साधना की।
बाबा का नाम विशेष रूप से उत्तराखंड के नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम से जुड़ा है। कैंची धाम आज देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है। यहां बाबा की स्मृति और हनुमान जी की उपासना से जुड़ा प्रमुख मंदिर है।
11 सितंबर ही क्यों है खास?
नीम करौली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में शरीर त्याग किया था। यही कारण है कि हर वर्ष 11 सितंबर को उनके अनुयायी इस दिन को पुण्यतिथि अथवा महाप्रयाण दिवस के रूप में स्मरण करते हैं। उपलब्ध जीवनी-स्रोतों के अनुसार बाबा का अंतिम समय वृंदावन में बीता और वहीं उनका समाधि स्थल भी है।
इस वर्ष 11 सितंबर 2026 को उनके शरीर त्यागे 53 वर्ष पूरे हो गए हैं। बाबा की भौतिक उपस्थिति भले ही नहीं है, लेकिन उनके भक्तों के बीच उनकी शिक्षाएं और स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।
बाबा को हनुमान जी का अंश या स्वरूप क्यों माना जाता है?
नीम करौली बाबा की सबसे बड़ी पहचान हनुमान जी के अनन्य भक्त के रूप में रही। उनके जीवन और साधना का हनुमान भक्ति से गहरा संबंध बताया जाता है। इसी कारण उनके अनेक भक्त श्रद्धापूर्वक उन्हें हनुमान जी का अंश, स्वरूप या अवतारी संत मानते हैं।
हालांकि यह बात आस्था और भक्तों की धार्मिक मान्यता के रूप में समझी जानी चाहिए, न कि ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में।
बाबा की शिक्षा का मूल भाव यही था कि ईश्वर की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव सेवा, प्रेम, करुणा और निस्वार्थ भाव के रूप में भी दिखाई देनी चाहिए।
हनुमान जी से बाबा का संबंध इतना विशेष क्यों माना जाता है?
बाबा के अनुयायियों के अनुसार हनुमान जी उनके आराध्य थे। बाबा से जुड़े कैंची धाम में भी हनुमान जी का प्रमुख मंदिर है। बाबा की आध्यात्मिक परंपरा में हनुमान जी को शक्ति, साहस, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
हनुमान जी की सबसे बड़ी विशेषता है—शक्ति होने के बावजूद अहंकार से दूर रहना और प्रभु राम की सेवा में स्वयं को समर्पित करना। बाबा की शिक्षाओं में भी प्रेम और सेवा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। इसी वजह से भक्त बाबा की साधना को हनुमान भक्ति से जोड़कर देखते हैं।
कैंची धाम क्यों जाना चाहिए?
कैंची धाम जाने के पीछे भक्तों की अलग-अलग आध्यात्मिक भावनाएं होती हैं। कोई बाबा का आशीर्वाद लेने जाता है, कोई हनुमान जी के दर्शन के लिए और कोई मन की शांति तथा ध्यान के लिए।
कैंची धाम आश्रम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह स्थान ध्यान, भजन, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का स्थल है।
कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालु सामान्यतः—
हनुमान जी के दर्शन करते हैं।
नीम करौली बाबा की स्मृति में श्रद्धा अर्पित करते हैं।
भजन और प्रार्थना करते हैं।
कुछ समय शांत वातावरण में ध्यान करते हैं।
सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को बाबा की शिक्षाओं से जोड़ते हैं।
लेकिन किसी भी तीर्थ यात्रा का वास्तविक उद्देश्य केवल मनोकामना मांगना नहीं, बल्कि अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना भी माना जा सकता है।
बाबा की सबसे बड़ी सीख—प्रेम और सेवा
नीम करौली बाबा की शिक्षाओं में प्रेम और सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है। उनके अनुयायियों के बीच प्रसिद्ध संदेश है कि आध्यात्मिकता केवल मंदिर जाने या पूजा करने तक सीमित नहीं है। मनुष्य के प्रति प्रेम और जरूरतमंद की सेवा भी ईश्वर की सेवा के समान महत्वपूर्ण है।
उनसे जुड़ी शिक्षाओं में ईमानदारी, दूसरों के प्रति करुणा, अहंकार से दूरी, परिस्थितियों को स्वीकार करना और उपयोगी कार्य करते रहना जैसे विचार प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
आज भी देश-विदेश में क्यों याद किए जाते हैं बाबा?
नीम करौली बाबा का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा। उनके शिष्यों और उनसे जुड़े पश्चिमी साधकों ने उनकी शिक्षाओं को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया। उनके प्रमुख अनुयायियों में राम दास और लैरी ब्रिलियंट जैसे नाम शामिल हैं। बाबा की शिक्षाओं से प्रभावित लोगों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित व्यक्तियों के नाम भी अक्सर लिए जाते हैं।
आज कैंची धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बढ़ती श्रद्धालु संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने कैंची धाम की बढ़ती भीड़ और यात्री क्षमता को लेकर अध्ययन भी किया है।
पुण्यतिथि पर क्या करें?
11 सितंबर को बाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार—
हनुमान चालीसा का पाठ, राम नाम का स्मरण, ध्यान, भजन, गरीबों एवं जरूरतमंदों की सहायता तथा निस्वार्थ सेवा कर सकते हैं।
बाबा के जीवन को समझने का सबसे सार्थक तरीका केवल उनके चमत्कारों की चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके बताए प्रेम, सेवा, सादगी और मानवता के मार्ग को अपने जीवन में उतारना है।
संदेश यही—भक्ति केवल मंदिर तक नहीं, व्यवहार में भी दिखाई दे
नीम करौली बाबा की 53वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक संत को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उस विचार को याद करना है जिसमें प्रेम को धर्म, सेवा को साधना और मानवता को ईश्वर की आराधना माना गया।
बाबा का शरीर आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके भक्तों के लिए उनका संदेश आज भी उतना ही जीवंत है—प्रेम करो, सेवा करो और ईश्वर को अपने भीतर महसूस करो।
जय श्रीराम।
जय हनुमान।
महाराज जी की जय।







