बारिश ने खोली कोरबा की सड़कों की पोल! गिट्टी बाहर, गड्ढे बेहिसाब और धूल से बेहाल जनता—सड़क बनी या सिर्फ बिल पास कराने का खेल?
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सड़कें उखड़ीं तो जिम्मेदार कौन? निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की परत निकलना गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, पांच साल की जवाबदेही तय करने की उठी मांग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। लगातार बारिश के बाद कोरबा शहर और आसपास की सड़कों की बदहाली ने एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ने से गिट्टियां बाहर निकल आई हैं, जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और अब बारिश थमने के बाद धूल का ऐसा गुबार उठ रहा है कि राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि बारिश में सड़क गड्ढों में तब्दील और धूप निकलते ही वही सड़क धूल का गुबार बन रही है। लोगों का सवाल सीधा है—आखिर सड़क निर्माण पर खर्च होने वाली राशि का परिणाम इतनी जल्दी क्यों दिखाई देने लगा?
गिट्टी बाहर निकलना सिर्फ खराब सड़क नहीं, गुणवत्ता की जांच का विषय

सड़क की सतह से गिट्टियां निकलना, परत का टूटना और जगह-जगह गड्ढे बनना कई तकनीकी कारणों से हो सकता है। इनमें सड़क की बेस और सब-बेस की सही तैयारी न होना, निर्धारित मोटाई का पालन नहीं होना, सामग्री की गुणवत्ता में कमी, पर्याप्त compaction न होना, बिटुमिन मिश्रण की गुणवत्ता या मात्रा में कमी और सबसे महत्वपूर्ण—जल निकासी की खराब व्यवस्था शामिल हो सकती है।
इसलिए किसी भी क्षतिग्रस्त सड़क को केवल ऊपर से गड्ढा भरकर छोड़ देना स्थायी समाधान नहीं है। जरूरत है कि संबंधित विभाग सड़क की तकनीकी जांच कर यह पता लगाए कि खराबी का वास्तविक कारण क्या है।
‘सड़क पांच साल चले’—जनता की मांग में कितना दम?
जनता की मांग है कि सड़क निर्माण में केवल उद्घाटन और भुगतान पर ध्यान न दिया जाए, बल्कि उसकी दीर्घकालिक मजबूती और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय हो।
हालांकि हर सड़क के लिए एक समान पांच साल की कानूनी गारंटी नहीं होती। सड़क की प्रकृति, विभाग, निविदा की शर्तों और अनुबंध में निर्धारित Defect Liability/Maintenance Period के अनुसार ठेकेदार की जिम्मेदारी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि संबंधित सड़क के टेंडर और वर्क ऑर्डर में दोष-दायित्व की अवधि कितनी निर्धारित की गई है।
लेकिन सवाल फिर भी गंभीर है—अगर किसी नई सड़क में शुरुआती बारिश के बाद ही बड़े पैमाने पर गिट्टियां निकलने लगें और सड़क की सतह टूट जाए, तो क्या उसकी गुणवत्ता की जांच नहीं होनी चाहिए?
सड़क निर्माण में आखिर किन बातों का रखा जाता है ध्यान?
एक टिकाऊ सड़क केवल डामर बिछाने से नहीं बनती। उसके नीचे की संरचना से लेकर ऊपर की अंतिम परत तक कई स्तरों पर गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी होता है।
सबसे पहले मिट्टी और जमीन की तैयारी, फिर निर्धारित मानकों के अनुसार Subgrade, उसके ऊपर Granular Sub-base और Base Course की मजबूती, उचित compaction और इसके बाद निर्धारित मिश्रण के अनुसार बिटुमिनस परत बिछाना महत्वपूर्ण होता है।
इसके साथ सड़क की ढाल और drainage भी बेहद महत्वपूर्ण है। पानी अगर सड़क की संरचना में लगातार प्रवेश करता रहे तो अच्छी सड़क भी समय से पहले खराब हो सकती है। इसलिए नालियों, क्रॉस-ड्रेनेज और पानी की निकासी की व्यवस्था सड़क की उम्र के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी निर्माण सामग्री।

कोरबा में सड़क या ‘गड्ढों का जाल’?
शहर में कई मार्गों पर वाहन चलाना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। बारिश के बाद उखड़ी सड़कें अब धूप निकलने पर धूल उड़ाने लगी हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढे और उखड़ी गिट्टियां परेशानी बढ़ा रही हैं, जबकि भारी वाहनों की आवाजाही वाले इलाकों में सड़क की स्थिति और तेजी से बिगड़ने की आशंका रहती है।
कोरबा जैसे औद्योगिक शहर में भारी वाहनों का दबाव भी सड़क की मजबूती की बड़ी परीक्षा है। इसलिए सड़क निर्माण में केवल सामान्य यातायात नहीं, बल्कि वास्तविक ट्रैफिक लोड और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
अब सिर्फ मरम्मत नहीं, होनी चाहिए जिम्मेदारी तय
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क खराब होने के बाद हर बार मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि खर्च करने की बजाय पहले यह तय क्यों न किया जाए कि सड़क समय से पहले खराब क्यों हुई?
यदि तकनीकी जांच में निर्माण एजेंसी या ठेकेदार की लापरवाही, निर्धारित मापदंडों से कम गुणवत्ता या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अनुबंध के अनुसार दोष सुधार, भुगतान रोकने/वसूली और अन्य संविदात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। गंभीर अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
जनता पूछ रही—सड़क की गुणवत्ता की जांच कब?
कोरबा की जनता अब केवल गड्ढे भरने की मांग नहीं कर रही, बल्कि यह जानना चाहती है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की जांच किसने की, गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट क्या है, सड़क की निर्धारित मोटाई कितनी थी, निर्माण की लागत कितनी थी और ठेकेदार की दोष-दायित्व अवधि कितनी है?
सड़कें जनता के पैसे से बनती हैं। इसलिए सड़क का कुछ ही समय में उखड़ना केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी धन, निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही का सवाल भी है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग कोरबा की खराब सड़कों का थर्ड-पार्टी तकनीकी ऑडिट कराए, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करे और जिन मामलों में कमी पाई जाए, वहां जिम्मेदारी तय करे।
जनता का सवाल साफ है—सड़क ऐसी बने कि बारिश उसका इम्तिहान ले, लेकिन सड़क ही बारिश में जवाब न दे।







