झीरम फैसले के बाद भाजपा का कांग्रेस पर बड़ा हमला: किरण देव बोले—13 साल बाद सच की अदालत में दस्तक, अब भूपेश बघेल बताएं जेब में कौन-सी पर्ची थी?
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एनआईए कोर्ट के फैसले का भाजपा ने किया स्वागत, कहा—101 गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि; झीरम के पीड़ित परिवारों को मिला न्याय की उम्मीद का बड़ा सम्बल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की सशक्त जांच का परिणाम बताया है। उन्होंने झीरम हमले को लोकतंत्र के इतिहास के सबसे बर्बर नक्सली हमलों में से एक बताते हुए कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
किरण देव ने कहा कि 25 मई 2013 का झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास पर लगा एक गहरा जख्म है। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर के जननेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार सहित कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। वर्षों से पीड़ित परिवार और प्रदेश की जनता इस मामले की सच्चाई सामने आने की प्रतीक्षा कर रही थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एनआईए की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो और समय कितना भी बीत जाए, न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों तक पहुंचा जा सकता है।
‘जेब में सबूत’ के दावे पर भूपेश बघेल को घेरा
किरण देव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुराने दावों को लेकर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बघेल बार-बार अपनी जेब में झीरम से जुड़े सबूत होने की बात कहते रहे और सार्वजनिक मंचों से कागज या पर्ची दिखाकर बड़े-बड़े दावे करते रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि अगर उनके पास इतने महत्वपूर्ण सबूत थे तो अपने पांच वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्होंने उन्हें न्यायालय के सामने क्यों नहीं रखा?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर वह कौन-सी पर्ची या दस्तावेज था, जिसे लेकर इतने वर्षों तक राजनीतिक दावे किए जाते रहे, लेकिन अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। भाजपा ने इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस की राजनीति और उसके दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस की नक्सलवाद पर नीति को लेकर भी हमला
किरण देव ने कांग्रेस नेताओं द्वारा नक्सलवाद को लेकर दिए गए कथित बयानों का उल्लेख करते हुए पार्टी की विचारधारा और राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश और राज्य नक्सली हिंसा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं, तब कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से नक्सलियों को लेकर सहानुभूतिपूर्ण या महिमामंडन वाले बयान सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि झीरम जैसे हमले में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को खोने वाली पार्टी के कुछ नेता आखिर नक्सलवाद के प्रति नरम भाषा क्यों इस्तेमाल करते हैं? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि नक्सलवाद के खिलाफ उसकी वास्तविक नीति क्या है।
‘लाल आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई’—भाजपा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान चला रही है। सुरक्षा बलों की बहादुरी, केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति तथा लगातार चल रहे अभियानों से बस्तर में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नक्सल हिंसा को रोकना नहीं, बल्कि बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा, विकास, विश्वास और न्याय पहुंचाना है। नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पित है।
झीरम मामले के फैसले को लेकर भाजपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि 13 वर्ष पुराने इस दर्दनाक अध्याय में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ना पीड़ित परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि झीरम की पूरी सच्चाई क्या है और इस भयावह हमले के पीछे जिम्मेदार हर व्यक्ति तक कानून कब और कैसे पहुंचेगा।
भाजपा ने कहा कि झीरम के पीड़ितों को न्याय दिलाना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र और छत्तीसगढ़ की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर दायित्व है।







