भादो में बदलिए थाली और दिनचर्या, वरना मौसम पड़ सकता है भारी!
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दही-गुड़ और पत्तेदार सब्जियों से दूरी, ताजा-गर्म व सुपाच्य भोजन को दें प्राथमिकता; तुलसी-अदरक का सेवन बताया हितकारी, बीपी मरीजों को विशेष सतर्कता की सलाह
29 अगस्त से शुरू हुआ भाद्रपद मास, 26 सितंबर तक रहेगा जारी — बारिश के मौसम में संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियों से बचने खान-पान व जीवनशैली में बदलाव जरूरी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा भाद्रपद यानी भादो मास की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही बारिश के मौसम का प्रभाव भी बना हुआ है। बदलते मौसम में वातावरण में नमी, जगह-जगह पानी का जमाव और साफ-सफाई की कमी के कारण मौसमी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में खान-पान और दैनिक जीवनशैली में थोड़ी सावधानी स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसी विषय पर छत्तीसगढ़ के आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने भाद्रपद मास के दौरान आहार-विहार को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने आयुर्वेद में बताए गए ऋतुचर्या के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौसम के अनुरूप खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करके स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है।
बारिश में पाचन पर पड़ता है असर, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन जरूरी
डॉ. शर्मा के अनुसार वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने के साथ पाचन संबंधी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में बहुत भारी, बासी अथवा आसानी से खराब होने वाले खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है।
उन्होंने ताजा, गर्म और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। भोजन में मूंग की खिचड़ी, पुराने अनाज जैसे जौ और गेहूं, लौकी, परवल, तोरई, मूंग, अदरक, जीरा, मेथी तथा अन्य आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार भोजन में घी या अन्य उपयुक्त स्निग्ध पदार्थों का सीमित उपयोग भी किया जा सकता है।
भादो में क्या खाएं? डॉक्टर की सलाह पर रखें इन चीजों को थाली में शामिल
बारिश के इस मौसम में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा के अनुसार—
ताजा और गर्म भोजन करें।
मूंग की खिचड़ी जैसे हल्के भोजन को प्राथमिकता दें।
जौ और गेहूं जैसे पुराने अनाज का उपयोग किया जा सकता है।
लौकी, परवल और तोरई जैसी सब्जियां लें।
अदरक, जीरा और मेथी जैसे मसालों का उचित मात्रा में उपयोग करें।
तुलसी की पत्तियों का सेवन किया जा सकता है।
अदरक और तुलसी को पानी में उबालकर गुनगुना पेय के रूप में लिया जा सकता है।
भोजन को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
पर्याप्त स्वच्छ पानी का सेवन करें।
दही, छाछ, गुड़ और पत्तेदार सब्जियों से दूरी की सलाह
डॉ. शर्मा ने भाद्रपद मास में कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी है। उनके अनुसार इस दौरान दही, छाछ, पत्तेदार सब्जियां और बासी भोजन से बचना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने गुड़, नारियल तेल, मछली, मांस और मदिरा से भी परहेज करने की सलाह दी है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में भोजन की स्वच्छता और ताजगी का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है।
कच्चे सलाद और खाद्य पदार्थों को लेकर विशेष सावधानी
बारिश के मौसम में संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों के बढ़ने की संभावना को देखते हुए कच्चे खाद्य पदार्थों के सेवन में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और आवश्यकता के अनुसार पकाकर ही सेवन करना चाहिए।
कच्ची सब्जियों अथवा सलाद के उपयोग में विशेष स्वच्छता बरतना जरूरी है। बाहर का खुला और लंबे समय से रखा हुआ भोजन भी इस मौसम में परेशानी का कारण बन सकता है।
बीपी मरीजों के लिए भादो में विशेष सावधानी
डॉ. नागेन्द्र शर्मा ने ब्लड प्रेशर के मरीजों को मौसम परिवर्तन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अपने स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए और चिकित्सक द्वारा बताई गई नियमित दवाएं तथा सलाह का पालन करना चाहिए।
किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या में केवल घरेलू अथवा आयुर्वेदिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
सिर्फ थाली नहीं, दिनचर्या में भी करना होगा बदलाव
भाद्रपद मास में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान के साथ जीवनशैली पर ध्यान देने की भी सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा के अनुसार इस मौसम में—
भीगने से बचें। यदि बारिश में भीग जाएं तो जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें।
गीली मिट्टी और कीचड़ में नंगे पैर चलने से बचें।
सीलन वाले स्थान पर अधिक समय न बिताएं।
बाहर से लौटने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह धोकर साफ करें।
स्वच्छ और हल्के कपड़े पहनें।
सोने के लिए अपेक्षाकृत सूखी और हवादार जगह का चयन करें।
उन्होंने अत्यधिक व्यायाम, अत्यधिक परिश्रम और अनावश्यक रात्रि जागरण से बचने की भी सलाह दी है।
मच्छरों से बचाव जरूरी, घर के आसपास पानी जमा न होने दें
बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए घर और आसपास साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है। कहीं भी पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी जैसे उपायों का इस्तेमाल करें।
खुले में सोने से बचने, गंदे अथवा संदिग्ध जलस्रोतों में स्नान न करने तथा बारिश के मौसम में व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
एक समय भोजन की परंपरा का भी उल्लेख
डॉ. शर्मा ने भाद्रपद मास से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए स्कंद पुराण में दिन में एक समय भोजन करने की बात कही। हालांकि भोजन की आवृत्ति हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, दवाओं और दैनिक जरूरतों पर निर्भर करती है। इसलिए बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या किसी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को भोजन की दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
आयुर्वेद का संदेश—मौसम बदले तो आहार-विहार भी बदले
डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में स्वास्थ्य की रक्षा के लिए दिनचर्या, रात्रिचर्या और ऋतुचर्या का विशेष महत्व बताया गया है। मौसम के बदलाव के साथ खान-पान और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन करने से व्यक्ति मौसमी परेशानियों से बचाव की दिशा में बेहतर कदम उठा सकता है।
भाद्रपद मास 29 अगस्त 2026 से 26 सितंबर 2026 तक रहेगा। ऐसे में इस पूरे समय स्वच्छता, संतुलित आहार, ताजा भोजन और सुरक्षित जीवनशैली को प्राथमिकता देना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
बारिश के मौसम में एक बात हमेशा याद रखें—थाली में स्वाद के साथ स्वच्छता, ताजगी और संतुलन भी जरूरी है।







