“देवी गंगा… देवी गंगा… लहर तुरंगा हो” से गूंजा नवापारा, भोजली की प्राचीन परंपरा ने जगाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अलख
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नौ दिनों की सेवा के बाद निकली ऐतिहासिक भोजली विसर्जन यात्रा, गीत-संगीत, सुवा नृत्य और पारंपरिक रंगों से सजा भव्य आयोजन
Tirentra Time’s Korba **//**// नवापारा (चैनपुर)। “देवी गंगा… देवी गंगा… लहर तुरंगा हो…” के पारंपरिक स्वरों से ग्राम नवापारा का वातावरण उस समय पूरी तरह लोकमय हो उठा, जब RKVS महिला प्रकोष्ठ एवं ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ की प्राचीन लोकसंस्कृति और आदिवासी परंपरा का प्रतीक भोजली पर्व हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया।
आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच अपनी जड़ों, बोली-भाखा, पहनावे, लोकगीत और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह आयोजन केवल पर्व नहीं, बल्कि पुरखों की विरासत को जीवंत रखने का एक भावनात्मक प्रयास बनकर सामने आया।
नौ दिनों की सेवा के बाद भोजली के विसर्जन का भावुक क्षण
परंपरा के अनुसार ग्राम गौंटिया एवं बैगा के घर भोजली बोई गई। महिलाओं और बच्चों ने लगातार नौ दिनों तक प्रतिदिन संध्या भोजली की सेवा एवं आराधना की। नौ दिनों की इस परंपरागत साधना के बाद विसर्जन के लिए भोजली को ग्राम प्रमुख के आंगन में लाया गया।
यहां आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी-अपनी सजाई हुई भोजली लेकर पहुंचीं। देखते ही देखते ग्राम प्रमुख का आंगन पारंपरिक रंगों से भर गया। भोजली सजावट के साथ मौलिक भोजली गायन प्रतियोगिता ने पूरे वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।
भोजली के पारंपरिक गीतों की मधुर गूंज सुनने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। ऐसा लगा मानो आधुनिकता के बीच कुछ देर के लिए छत्तीसगढ़ का पुराना लोकजीवन फिर से लौट आया हो।

आठ टीमों ने दी भोजली गायन में शानदार प्रस्तुति
भोजली गायन प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने पारंपरिक अंदाज में भोजली गीत प्रस्तुत कर अपनी संस्कृति, आस्था और लोकपरंपरा की शानदार झलक पेश की।
इसके बाद ग्राम बैगा, गौंटिया एवं प्रमुखों द्वारा भोजली का विधिवत पूजन किया गया। गौंटिन एवं बैगिन की अगुवाई में भोजली विसर्जन यात्रा बाजे-गाजे के साथ तालाब की ओर रवाना हुई।
यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, लोगों का कारवां भी बढ़ता गया। रास्ते में पड़ने वाले देवस्थलों पर बैगा एवं गौंटिया द्वारा पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तालाब की पचरी को पवित्र कर भोजली को विसर्जन के लिए रखा गया।
अंतिम आराधना के पश्चात बैगिन एवं गौंटिन द्वारा भोजली का विसर्जन किया गया। इस दौरान वातावरण बेहद भावुक हो गया। नौ दिनों तक अपने साथ रही भोजली से विदाई के क्षण में कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
विसर्जन के बाद भी जिंदा रही सदियों पुरानी परंपरा
विसर्जन के पश्चात महिलाएं प्रसाद ग्रहण करते हुए पुनः गौंटिया के आंगन में पहुंचीं। यहां विसर्जन के समय बचाकर रखी गई भोजली से “भोजली मितान” बनाने की प्राचीन परंपरा को निभाया गया।
इस परंपरा ने आयोजन को सिर्फ धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया।
मंच पर बिखरी लोककला की छटा, सुवा नृत्य ने बांधा समां
भोजली पर्व के पारंपरिक आयोजन के बाद मंचीय कार्यक्रम का रंग और भी गहरा हो गया। दूर-दूर से पहुंची महिलाओं ने पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। नृत्य, गीत और पारंपरिक वेशभूषा ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक पुरस्कार देकर उनका हौसला बढ़ाया।
थाना प्रभारी ने साइबर ठगी से बचाव का दिया संदेश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रेणुका राठिया, जिला पंचायत सदस्य क्रमांक 01, अध्यक्षता श्री छत्रपाल सिंह राठिया, सरपंच, तथा विशिष्ट अतिथि श्री गणेश यादव, थाना प्रभारी करतला उपस्थित रहे।
‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा के तहत अतिथियों का पीला गमछा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।
विशिष्ट अतिथि थाना प्रभारी गणेश यादव ने अपने उद्बोधन में ग्रामीणों को साइबर अपराध से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर आने वाला OTP अथवा व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल से दूर रखते हुए पढ़ाई की ओर प्रेरित करने की अपील की।
उन्होंने लोगों को नशे से दूर रहने तथा नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने का भी संदेश दिया।
“भोजली समरसता का प्रतीक है”—रेणुका राठिया
अपने उद्बोधन में रेणुका राठिया ने आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक पहनावे को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी जुड़ाव का प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और पुरखों की परंपराओं से जोड़ते हैं।
गीत के जरिए संस्कृति बचाने का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामलाल राठिया ने आदिवासी संस्कृति, परंपरा, बोली-भाखा, पहनावा एवं पारंपरिक पकवानों को सहेजकर आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने अपनी बात को तुकबंदी और गीत के माध्यम से बेहद प्रभावी अंदाज में रखा—
“भुले जाबो, भुले जाबो, भुले जाबो का,
गांव के ठाकुर देवता ल, डिही मोर डिहारेन ल भुले जाबो का…”
उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाने और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का संदेश दिया।
प्रतियोगिताओं में विजेताओं का हुआ सम्मान
भोजली पर्व पर पहली बार आयोजित इस बड़े आयोजन को सफल एवं मनोरंजक बनाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।
भोजली गायन प्रतियोगिता
🥇 प्रथम — जानकी राठिया एंड पार्टी, परधान पारा
🥈 द्वितीय — लीलावती एंड पार्टी, ठाकुरपारा
🥉 तृतीय — समारी बाई एंड पार्टी, खुतहापारा
भोजली सजावट प्रतियोगिता
🥇 प्रथम — रमसिला राठिया
🥈 द्वितीय — फूलबाई राठिया
🥉 तृतीय — केवलाबाई राठिया
सुवा नृत्य प्रतियोगिता
🥇 प्रथम — ऊपरपारा
🥈 द्वितीय — ठाकुरपारा
इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में ग्राम गौंटिया शांतिलाल राठिया, ग्राम बैगा अमरसिंह राठिया, डॉ. साधराम राठिया, परियाद राम राठिया, परमेश्वर सिंह राठिया, हिमानी डीजे ग्रुप, यादन सिंह राठिया, नरेश राठिया, गोपाल राठिया, ललित राठिया, मदनमोहन राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ से उमा राठिया गौंटिन, बिमला राठिया, त्रिवेणी राठिया, संतोषी राठिया, लीला राठिया, दीना राठिया, झनक कंवर, रुक्मणी राठिया, फूलबाई राठिया, चंद्रमा राठिया, शैल कुमारी राठिया एवं मीना राठिया सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता की।
इसके अलावा पिंकी राठिया, दिलादास महंत, महावीर पटेल, दूजेराम पटेल, चक्रधरसिंह कंवर, मनमोहन सिंह राठिया, करमसिंह राठिया, दुबराज सिंह राठिया, नरेश्वर सिंह राठिया, डॉ. कुमार राठिया, चनेशराम राठिया, निर्मल सिंह राठिया, सागर सिंह राठिया, जगमाल सिंह राठिया, देवप्रसाद राठिया, सुदर्शन राठिया सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में थाना स्टाफ करतला का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. भावना राठिया एवं दुबराज सिंह राठिया ने किया। सरपंच छत्रपाल सिंह राठिया ने आभार व्यक्त किया, जबकि बैगा एवं गणमान्य नागरिक अमरसिंह राठिया तथा परियादराम राठिया ने सभा समाप्ति की घोषणा की।
पूरे कार्यक्रम का कव्हरेज यू-ट्यूबर चनेशराम राठिया, ढोढ़ागांव (सिसरिंगा) एवं महावीर पटेल, मीडिया प्रभारी नवापारा द्वारा किया गया।
भोजली ने दिया संदेश—परंपरा बचेगी, तभी संस्कृति की पहचान बचेगी
नवापारा में आयोजित भोजली पर्व ने यह संदेश दिया कि लोकपर्व केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली, अपनी परंपरा और पुरखों की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का जीवंत माध्यम हैं। गीतों की गूंज, सुवा नृत्य की थिरकन और भोजली विसर्जन की भावुक विदाई ने इस आयोजन को लंबे समय तक याद रखने योग्य बना दिया।







