“नोवेल्टी के नाम पर भगवान के स्वरूप से खिलवाड़ नहीं!” गणेश प्रतिमाओं को लेकर हिंदू नारायणी सेना का कड़ा रुख
1 min read



कार्टून, डांसिंग, AI और बाल रूप की प्रतिमाओं पर जताई आपत्ति; शास्त्रसम्मत स्वरूप में प्रतिमा निर्माण की मांग, कलेक्टर ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। गणेश उत्सव से पहले भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप और प्रतिमा निर्माण में पर्यावरणीय मानकों को लेकर हिंदू नारायणी सेना ने कड़ा रुख अपनाया है। हिंदू नारायणी सेना कोरबा के प्रमुख अरविंद अग्रवाल के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने कोरबा कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि गणेश उत्सव के दौरान कुछ मूर्तिकार भगवान गणेश के पारंपरिक एवं शास्त्रसम्मत स्वरूप से हटकर कार्टून, बाल रूप, AI आधारित, नाचते-गाते या डांस करते हुए स्वरूपों में प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
संगठन ने ऐसी प्रतिमाओं को धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी चिंता का विषय बताते हुए प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
“भगवान की प्रतिमा में प्रयोग नहीं, श्रद्धा और शास्त्रसम्मत स्वरूप चाहिए”


हिंदू नारायणी सेना का कहना है कि आजकल कुछ पूजा समितियां हर वर्ष कुछ नया, अलग और आकर्षक दिखाने की होड़ में ऐसी प्रतिमाओं का ऑर्डर देती हैं, जिनमें भगवान गणेश के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव दिखाई देता है।
संगठन ने पूजा समितियों से अपील की है कि ‘कुछ नया’ और ‘कुछ अलग’ करने की प्रतिस्पर्धा में आराध्य देव के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ न कराई जाए। भगवान गणेश की प्रतिमा धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुरूप वास्तविक एवं विराट स्वरूप में ही बनवाई जाए।
हिट लाइन—“पंडाल की सजावट बदलें, आराध्य का स्वरूप नहीं!”
हिंदू नारायणी सेना ने शहर की सभी गणेश पूजा समितियों से हाथ जोड़कर आग्रह किया है कि प्रतिमा का ऑर्डर देने से पहले उसके स्वरूप पर गंभीरता से विचार किया जाए।
संगठन का कहना है कि पूजा समितियों को ऐसी प्रतिमाओं का ऑर्डर नहीं देना चाहिए और न ही ऐसी प्रतिमाएं खरीदनी चाहिए, जिनके स्वरूप को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका हो।
समितियां पंडाल की साज-सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, सामाजिक संदेश और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में नवीनता ला सकती हैं, लेकिन संगठन के अनुसार आराध्य भगवान के स्वरूप को केवल आकर्षण या आधुनिकता के नाम पर बदलना उचित नहीं है।
युवाओं और गणेश उत्सव समितियों से विशेष अपील
हिंदू नारायणी सेना ने विशेष रूप से गणेश उत्सव में सक्रिय रहने वाले युवाओं और पूजा समितियों से अपील की है कि वे इस विषय पर विशेष ध्यान दें।
संगठन का कहना है कि युवा पीढ़ी ही गणेश उत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित करती है। इसलिए युवाओं की जिम्मेदारी है कि उत्सव में भव्यता के साथ-साथ धार्मिक मर्यादा और परंपरा का भी ध्यान रखा जाए।
“भव्य उत्सव हो, लेकिन भगवान के स्वरूप की मर्यादा के साथ”— इसी भावना के साथ संगठन ने समितियों से प्रतिमा चयन में सावधानी बरतने का आग्रह किया है।
POP और प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं पर भी आपत्ति
ज्ञापन में हिंदू नारायणी सेना ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनाई जाने वाली प्रतिमाओं को लेकर भी पर्यावरणीय चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का भी अवसर होना चाहिए।
इसीलिए संगठन ने ऐसी प्रतिमाओं को बढ़ावा देने के बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को प्राथमिकता देने की अपील की है।
कलेक्टर से कठोर कार्रवाई की मांग
हिंदू नारायणी सेना ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि भगवान गणेश के कथित रूप से शास्त्रसम्मत स्वरूप से छेड़छाड़ करने वाले और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाले मूर्तिकारों के संबंध में प्रशासन द्वारा जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक एवं कठोर कार्रवाई की जाए।
संगठन के अनुसार कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि ऐसे मामलों में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
“प्रतिमा खरीदने से पहले पूजा समितियां खुद भी सोचें”
हिंदू नारायणी सेना ने कहा कि केवल मूर्तिकार ही नहीं, बल्कि पूजा समितियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि समितियां ऐसी प्रतिमाओं का ऑर्डर ही नहीं देंगी, तो इस प्रकार की प्रतिमाओं के निर्माण को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
संगठन ने समितियों से कहा कि प्रतिमा का ऑर्डर देते समय यह देखा जाए कि भगवान गणेश का स्वरूप धार्मिक परंपराओं के अनुरूप हो और प्रतिमा निर्माण में पर्यावरण संबंधी लागू नियमों का पालन किया गया हो।
गणेश उत्सव में भक्ति सबसे आगे, दिखावा पीछे
हिंदू नारायणी सेना का कहना है कि गणेश उत्सव का मूल उद्देश्य भगवान गणेश की आराधना, श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता है। इसलिए उत्सव की भव्यता ऐसी होनी चाहिए जो आस्था को मजबूत करे, न कि आराध्य के स्वरूप को लेकर विवाद खड़ा करे।
पंडाल बड़ा हो सकता है, सजावट आधुनिक हो सकती है, तकनीक का इस्तेमाल भी हो सकता है—लेकिन श्रद्धा और धार्मिक मर्यादा से समझौता नहीं होना चाहिए, ऐसा संगठन ने कहा है।
अंत में हिंदू नारायणी सेना ने कोरबा शहर के सभी गणेश उत्सव आयोजकों, पूजा समितियों और विशेष रूप से युवाओं से अपील की है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और भगवान गणेश की प्रतिमा का चयन करते समय धार्मिक परंपरा तथा पर्यावरणीय नियमों का ध्यान रखें।
हिंदू नारायणी सेना का संदेश स्पष्ट है—गणेश उत्सव को भव्य बनाइए, यादगार बनाइए, लेकिन “नोवेल्टी” और “आधुनिकता” की होड़ में आराध्य देव के स्वरूप और पर्यावरण की मर्यादा से खिलवाड़ न होने दें।







