रक्षाबंधन पर परीक्षा का दबाव क्यों? भाई-बहन के पर्व पर विद्यार्थियों को परिवार से दूर करना कितना उचित!
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“त्योहार में बहन मायके आती है, भाई उसके घर जाता है—फिर परीक्षा के बीच परिवार कैसे निभाएगा यह रिश्ता?”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। रक्षाबंधन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, परिवार के मिलन और सामाजिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पहले और एक दिन बाद विद्यालयों में परीक्षा आयोजित करने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल, कोरबा ने इसी मुद्दे को उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस अवधि में परीक्षाएं नहीं कराने की मांग की है।
हिट लाइन: “बहन राखी बांधने आएगी या परीक्षा देने?”
रक्षाबंधन के दिन और उसके आसपास बड़ी संख्या में परिवार अपने रिश्तेदारों, मायके और पैतृक गांवों की ओर यात्रा करते हैं। कई बहनें दूर शहरों से अपने भाइयों के घर पहुंचती हैं, तो कई भाई अपनी बहनों से राखी बंधवाने के लिए दूसरे शहर या गांव जाते हैं।
ऐसे में यदि किसी विद्यार्थी की परीक्षा ठीक रक्षाबंधन के पहले या बाद निर्धारित हो, तो परिवार के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है—बच्चा परीक्षा की तैयारी करे, परीक्षा देने जाए या परिवार के साथ रक्षाबंधन मनाने के लिए यात्रा करे?
रक्षाबंधन के एक दिन पहले परीक्षा हुई तो परेशानी यहीं से शुरू
मान लीजिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा रक्षाबंधन से एक दिन पहले है। परिवार को दूसरे शहर या गांव जाना है। यात्रा की तैयारी, आने-जाने का समय और परीक्षा की तैयारी—तीनों एक साथ करने पड़ेंगे।
दूसरी ओर, यदि परीक्षा रक्षाबंधन के अगले दिन रखी गई है, तो पर्व मनाकर वापस लौटने के लिए परिवार के पास पर्याप्त समय नहीं रहेगा। दूर-दराज से आने वाले परिवारों के लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है।
त्योहार के लिए घर से निकला परिवार क्या करे—रास्ते में लौटकर परीक्षा दिलाए या बच्चे को अकेला छोड़कर पर्व मनाए?
“परिवार एक दिन का नहीं, रिश्ता जिंदगी भर का”
रक्षाबंधन का महत्व केवल राखी बांधने की रस्म तक सीमित नहीं है। यह ऐसा अवसर है जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे से मिलने के लिए दूर-दूर से घर लौटते हैं। कई परिवारों में भाई-बहन पूरे वर्ष एक साथ नहीं मिल पाते और रक्षाबंधन उनके लिए मिलने का विशेष अवसर होता है।
ऐसे में परीक्षा कार्यक्रम बनाते समय पर्व की तिथि और विद्यार्थियों की पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना एक संवेदनशील प्रशासनिक निर्णय हो सकता है।
पढ़ाई भी जरूरी, लेकिन परीक्षा की तारीख बदली जा सकती है
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा क्यों नहीं होनी चाहिए?
इसका जवाब यह है कि परीक्षा विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए जरूरी है, लेकिन परीक्षा की तारीख स्थायी नहीं होती। विद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर में आवश्यकता के अनुसार परीक्षा कार्यक्रम को आगे-पीछे किया जा सकता है।
यदि रक्षाबंधन के एक दिन पहले या एक दिन बाद परीक्षा निर्धारित है, तो उसे किसी अन्य उपयुक्त कार्यदिवस में आयोजित किया जा सकता है। इससे न पढ़ाई प्रभावित होगी और न ही विद्यार्थियों को पारिवारिक पर्व के दौरान परीक्षा के दबाव में रहना पड़ेगा।
“परीक्षा टले, पढ़ाई नहीं”
विहिप बजरंग दल की मांग का मूल उद्देश्य भी यही बताया गया है कि परीक्षा समाप्त नहीं की जाए, बल्कि उसकी तारीख को समायोजित किया जाए।
विद्यालयों में परीक्षा कार्यक्रम पहले से निर्धारित होता है। यदि शिक्षा विभाग समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है, तो विद्यालय वैकल्पिक तारीख निर्धारित कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी पहले से जानकारी मिल जाएगी।
क्या हर विद्यार्थी बाहर जाता है? नहीं, लेकिन बहुतों के लिए यह जरूरी है
यह भी सही है कि हर विद्यार्थी रक्षाबंधन पर यात्रा नहीं करता। कुछ परिवार अपने ही शहर में पर्व मनाते हैं। लेकिन परीक्षा कार्यक्रम पूरे जिले के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।
ऐसे में उन विद्यार्थियों की स्थिति भी देखी जानी चाहिए जिनके परिवारों को त्योहार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुविधा और विकास सुनिश्चित करना है, उनकी पारिवारिक परिस्थितियों को अनदेखा करना नहीं।
शिक्षा विभाग के सामने अब बड़ा सवाल
अब गेंद जिला शिक्षा विभाग के पाले में है। क्या रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक पर्व की संवेदनशीलता को देखते हुए परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव किया जाएगा? क्या जिले के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों के लिए समान दिशा-निर्देश जारी होंगे?
विहिप बजरंग दल ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि रक्षाबंधन के एक दिन पूर्व और एक दिन बाद परीक्षा नहीं कराने के संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किया जाए। यदि परीक्षा पहले से निर्धारित है, तो उसे दूसरी तिथि पर कराने की व्यवस्था की जाए।
आखिर फैसला ऐसा क्यों न हो, जिसमें दोनों की जीत हो?
पढ़ाई भी जरूरी है और पर्व भी। परीक्षा भी जरूरी है और परिवार भी।
जब परीक्षा की तारीख बदली जा सकती है, तो रक्षाबंधन के आसपास विद्यार्थियों को परिवार के साथ पर्व मनाने का अवसर देने में क्या कठिनाई है?
एक दिन की परीक्षा आगे हो सकती है, लेकिन भाई-बहन का यह मिलन बार-बार नहीं आता।
इसी भावना के साथ विहिप बजरंग दल ने शिक्षा विभाग से संवेदनशीलता दिखाने और विद्यार्थियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। अब कोरबा के विद्यार्थी और अभिभावक जिला शिक्षा विभाग के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।







