August 8, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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पाटन चुनाव विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री पर साधा निशाना, कहा—कानून के सवालों से भागने की कोशिश नाकाम
बृजेश पाण्डेय का तीखा हमला—“सत्ता चली गई, अब कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश भी बेनतीजा”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**  रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े पाटन विधानसभा चुनाव विवाद ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका को आगे बढ़ने से रोकने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बघेल को फिलहाल राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के उस रुख में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया गया था। अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में आगे बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि बघेल अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक आपत्तियां हाईकोर्ट में चलने वाले ट्रायल के दौरान उठा सकते हैं। यानी अदालत ने उनके पक्ष को अंतिम रूप से खारिज नहीं किया है, लेकिन चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की गई।
इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बृजेश पाण्डेय ने इसे बघेल के लिए बड़ा राजनीतिक और नैतिक झटका बताते हुए कहा कि अब उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
“अदालत में रोक नहीं मिली, अब सवालों का सामना करना होगा”
बृजेश पाण्डेय ने कहा कि 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव को लेकर दायर चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच का रास्ता बंद नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बघेल ने चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कथित रूप से 48 घंटे के साइलेंस पीरियड से संबंधित नियमों के उल्लंघन को लेकर विजय बघेल की ओर से चुनाव याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में प्रचार और रोड शो से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों का अंतिम निर्णय अभी न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
भाजपा का हमला—“राजनीति से नहीं, अब अदालत में देना होगा जवाब”
पाण्डेय ने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन जब मामला न्यायालय के समक्ष पहुंच चुका है तो उसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा। उन्होंने बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि कानूनी सवालों से बचने के बजाय उन्हें अदालत के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से चुनाव याचिका की सुनवाई का रास्ता खुला हुआ है। उनके मुताबिक अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर न्यायिक परीक्षण की स्थिति बन गई है।
बघेल के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किलें?
भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के घटनाक्रम को पूर्व मुख्यमंत्री के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिस चुनाव को लेकर लंबे समय से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, अब उससे जुड़े कानूनी सवालों पर हाईकोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ेगी।
पाण्डेय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल जीत-हार का विषय नहीं होता, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि यदि बघेल को चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप गलत लगते हैं तो उन्हें अदालत के समक्ष अपने दस्तावेज और कानूनी तर्क रखने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह अवसर दिया है कि वे हाईकोर्ट के समक्ष अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक बचाव प्रस्तुत कर सकें।
“अंतिम फैसला अदालत करेगी, लेकिन प्रक्रिया से बचने की कोशिश सफल नहीं हुई”
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बघेल के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता और उनके कानूनी परिणाम का निर्णय आगे की न्यायिक कार्यवाही में होगा।
लेकिन राजनीतिक तौर पर भाजपा ने इस घटनाक्रम को अपने पक्ष में बड़ा मुद्दा बना लिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव विवाद को शुरुआती स्तर पर खत्म कराने की कोशिश सफल नहीं हुई और अब मामला न्यायिक परीक्षण के अगले चरण में जाएगा।
पाण्डेय ने कहा कि सत्ता में रहते हुए नियमों और संवैधानिक संस्थाओं की दुहाई देने वाले नेताओं को सत्ता से बाहर होने के बाद भी न्यायिक संस्थाओं के प्रति वही सम्मान बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून किसी व्यक्ति के पद, राजनीतिक कद या सत्ता से प्रभावित नहीं होता और लोकतंत्र में हर व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
भाजपा ने कहा—“अब फैसला अदालत के हाथ में”
भाजपा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इस बात का संकेत है कि पाटन चुनाव विवाद से जुड़ी याचिका को हाईकोर्ट में आगे सुना जा सकता है। वहीं, बघेल के पास अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष रखने का अधिकार बरकरार है।
अब निगाहें हाईकोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों और बघेल की ओर से प्रस्तुत बचाव पर न्यायिक रूप से क्या निष्कर्ष निकलता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर रोकने या समाप्त करने के लिए बघेल की मांग पर हस्तक्षेप नहीं किया है—और इसी घटनाक्रम को भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताते हुए कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है

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