छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: महिला जनप्रतिनिधियों की जगह अब नहीं चलेगी ‘प्रॉक्सी व्यवस्था’
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पति, पिता, पुत्र या रिश्तेदार नहीं करेंगे सत्ता का संचालन; नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी किए सख्त निर्देश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। छत्तीसगढ़ की नगर सरकारों में वर्षों से चर्चा का विषय रही ‘प्रॉक्सी जनप्रतिनिधि’ व्यवस्था पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UAD) ने राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों तथा नगर पंचायतों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति, पिता, पुत्र अथवा अन्य पारिवारिक रिश्तेदारों को प्रॉक्सी प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह आदेश 12 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर अटल नगर द्वारा जारी किया गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की आपत्ति के बाद सख्ती
विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के विपरीत माना था। आयोग के पत्र और पूर्व निर्देशों के आधार पर राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनका पारिवारिक सदस्य बैठकों, निर्णयों या प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करता है, तो ऐसी व्यवस्था समाप्त की जाए।
2010 के पुराने निर्देशों को फिर किया गया प्रभावी
शासन ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि 20 अगस्त 2010 को जारी निर्देश पहले से लागू थे, लेकिन कई निकायों में उनका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा था। अब इन निर्देशों को और अधिक सख्ती से लागू करने के लिए सभी निकायों से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
महिलाओं के अधिकारों की रक्षा पर जोर
विभाग ने कहा है कि महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल उन्हें निर्वाचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर देना है। यदि उनके स्थान पर कोई रिश्तेदार निर्णय लेता है, तो यह महिला प्रतिनिधित्व की मूल भावना के विपरीत है।
संविधान के प्रावधानों का भी उल्लेख
आदेश में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15(3) और अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन संविधान की भावना के विरुद्ध है। इसी आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने की अनुशंसा की थी।
सभी निकायों से मांगी गई जानकारी
शासन ने सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे मामलों की पहचान करें जहां निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके रिश्तेदार कार्य कर रहे हों और ऐसी व्यवस्था तत्काल समाप्त कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अब बढ़ेगी निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि अब निर्वाचित महिला पार्षद, अध्यक्ष और महापौर स्वयं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगी और निकायों में प्रॉक्सी व्यवस्था पर प्रभावी रोक लगेगी।
मुख्य बातें
कहां का मामला? — छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत)।
आदेश किसने जारी किया? — छत्तीसगढ़ शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UAD), मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर अटल नगर।
आदेश कब जारी हुआ? — 12 दिसंबर 2025।
आधार क्या है? — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश और संविधान के प्रावधान।
क्या होगा? — निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति, पिता, पुत्र या अन्य रिश्तेदार प्रॉक्सी प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे।


