गुरु चरणों में झुका भविष्य: लिटिल स्टेप स्कूल में गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन ने जगाई भारतीय संस्कृति की अलख
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तिलक, आरती और पुष्प अर्पण कर विद्यार्थियों ने किया गुरुजनों का अभिनंदन, भारत विकास परिषद के आयोजन में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का दिया गया संदेश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा, 1 अगस्त। आधुनिक शिक्षा के दौर में जहां गुरु-शिष्य परंपरा धीरे-धीरे औपचारिकता तक सीमित होती जा रही है, वहीं लिटिल स्टेप स्कूल में आयोजित ‘गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन’ समारोह ने भारतीय संस्कृति की उस गौरवशाली परंपरा को जीवंत कर दिया, जिसमें गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। भारत विकास परिषद, शक्ति स्वरूपा शाखा, कोरबा के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त कर पूरे वातावरण को भावनात्मक और संस्कारमय बना दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद, शक्ति स्वरूपा शाखा की अध्यक्ष श्रीमती पद्मिनी साहू थीं। उनके साथ राष्ट्रीय गतिविधि संस्कार प्रकल्प के सदस्य श्री धर्मेश कुंदेशरिया, संस्कार प्रमुख श्री विष्णु मिश्रा, श्री महेश गुप्ता, श्रीमती भारती अरोरा, श्रीमती पूर्णिमा सोनी, गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन प्रकल्प प्रमुख श्रीमती मीना पुरी, श्रीमती ललिता सिंह, श्रीमती हेमा शर्मा, विद्यालय के प्रबंधक श्री विजेंद्र सिंह एवं प्राचार्या श्रीमती मीना पुरी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

समारोह की सबसे भावपूर्ण झलक तब देखने को मिली जब विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का तिलक, आरती एवं पुष्प अर्पित कर सम्मान किया। गुरुजनों ने भी विद्यार्थियों को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद देते हुए उन्हें जीवन में अनुशासन, परिश्रम, सत्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। पूरा विद्यालय गुरु सम्मान की भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
मुख्य अतिथि श्रीमती पद्मिनी साहू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों का सम्मान करें, उनके बताए मार्ग पर चलें और अच्छे संस्कारों के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
संस्कार प्रमुख श्री विष्णु मिश्रा, श्री धर्मेश कुंदेशरिया एवं श्रीमती भारती अरोरा ने अपने प्रेरक विचारों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता, भारतीय संस्कृति की गरिमा तथा नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार और चरित्र निर्माण भी जुड़ा हो।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वागत गीत, गुरु वंदना तथा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, गुरु सम्मान और राष्ट्रभक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसे उपस्थित अतिथियों ने खूब सराहा।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, चरित्र निर्माण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। विद्यालय परिवार एवं भारत विकास परिषद ने भविष्य में भी ऐसे संस्कारप्रधान आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को “गुरु ही जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं” का संदेश देने वाला प्रेरणादायी संस्कार उत्सव बन गया।


