“ज़मीन की हकीकत तो बचपन के दोस्त ही जानते हैं…” फ्रेंडशिप डे पर बरसों बाद मिला यारों का कारवां, यादों, गीत-संगीत और जश्न से गूंज उठा समारोह
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। कहते हैं कि इंसान की असली पहचान, उसका स्वभाव, उसकी शरारतें, उसका संघर्ष और उसकी ज़मीन की हकीकत अगर कोई जानता है, तो वह बचपन का दोस्त ही होता है। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर इसी अटूट रिश्ते को यादगार बनाने के लिए बचपन के दोस्तों का भव्य मिलन समारोह आयोजित किया गया। वर्षों बाद जब सभी मित्र एक-दूसरे से मिले तो पुरानी यादें, स्कूल के दिन, शरारतें, खेलकूद, पढ़ाई और साथ बिताए गए अनगिनत पल फिर से आंखों के सामने जीवंत हो उठे।

समारोह में सभी मित्रों का आत्मीय स्वागत किया गया। एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड पहनाकर दोस्ती का सम्मान किया गया और आकर्षक केक काटकर फ्रेंडशिप डे का जश्न मनाया गया। सभी ने एक-दूसरे को केक खिलाकर जीवनभर दोस्ती निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर दोस्तों ने कहा कि बचपन का साथी ही जानता है कि कौन स्कूल में कितना शरारती था, कौन पढ़ाई में आगे रहता था, कौन खेल का चैंपियन था, किसका रहन-सहन कैसा था और किसने जीवन में किन संघर्षों का सामना किया। समय के साथ जिम्मेदारियां बदल गईं, जीवन की राहें अलग हो गईं, लेकिन बचपन की दोस्ती आज भी उतनी ही मजबूत और सच्ची बनी हुई है।


कार्यक्रम में दोस्तों ने मिलकर दोस्ती के गीत गाए, संगीत का आनंद लिया, हंसी-ठिठोली की और पुराने किस्सों को याद करते हुए ठहाकों से पूरा माहौल गुंजायमान कर दिया। कई मित्र भावुक भी हुए और कहा कि वर्षों बाद इस तरह का मिलन उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गया है।
समारोह में उपस्थित सभी मित्रों ने यह संकल्प भी लिया कि हर वर्ष फ्रेंडशिप डे पर इसी तरह मिलकर दोस्ती के इस अमूल्य रिश्ते को और मजबूत करेंगे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक फोटो, शुभकामनाओं और एक-दूसरे के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ हुआ।
फ्रेंडशिप डे का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देकर गया कि समय, दूरी और परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन बचपन की दोस्ती कभी नहीं बदलती। क्योंकि इंसान की असली कहानी, उसकी ज़िंदगी की सच्चाई और उसकी ज़मीन की हकीकत केवल बचपन के दोस्त ही जानते हैं।


