कुदुरमाल पुल: वादों का पुल या जनता के साथ छल? साल बीतने को, फिर भी अधूरा सपना, हजारों लोग रोज़ भुगत रहे परेशानी
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बरसात आते ही बढ़ जाती है मुश्किलें, ट्रक चालकों से लेकर ग्रामीणों तक में भारी नाराज़गी, सवाल—आखिर कब मिलेगा कुदुरमाल पुल का तोहफा?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। वर्षों से कुदुरमाल पुल का इंतजार कर रहे क्षेत्र के लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। एक ओर सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, दूसरी ओर कुदुरमाल पुल आज भी अधूरे वादों का प्रतीक बना हुआ है। हालत यह है कि एक और बरसात गुजर रही है और पुल का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम नागरिकों का सवाल है कि आखिर कब तक जनता को केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा?
बरसात के दिनों में इस मार्ग से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है। सड़क पर जलभराव, घंटों का जाम और भारी वाहनों की लंबी कतारें आम बात बन चुकी हैं। ट्रक चालकों का कहना है कि पुल के अभाव में उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे डीजल, समय और परिवहन लागत कई गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा असर व्यापार और आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय पुल निर्माण को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा जल्द निर्माण पूरा होने का भरोसा दिया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी जस की तस है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुदुरमाल पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरत है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थी, मरीज, किसान, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग हर दिन इस समस्या से जूझ रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे गंभीर मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।
ट्रक मालिकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि पुल नहीं बनने से रोजाना लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। समय पर माल नहीं पहुंचने से उद्योग और व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पुल समय पर बन गया होता तो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलता।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस परियोजना में देरी की असली वजह क्या है? यदि तकनीकी बाधा है तो जनता को बताया जाए, यदि बजट की समस्या है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, और यदि ठेकेदार या संबंधित एजेंसी की लापरवाही है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
जनता की मांग है कि प्रशासन और सरकार पुल निर्माण की स्पष्ट समय-सीमा घोषित करे, निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करे। वर्षों से अधूरी पड़ी यह परियोजना अब केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का भी सवाल बन चुकी है।
जनता पूछ रही है—
कुदुरमाल पुल आखिर कब तक बनेगा?
निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
कितनी राशि खर्च हुई और कितना काम पूरा हुआ?
क्या इस बरसात के बाद भी लोगों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ेगा?


