विश्व हेपेटाइटिस डे पर जागरूकता की अनूठी पहल: निःशुल्क आयुर्वेद-योग शिविर में सैकड़ों लोगों ने लिया स्वास्थ्य लाभ
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लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट एवं आयुष मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त आयोजन में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया स्वस्थ लिवर का मंत्र, योग, सात्विक आहार और नशामुक्त जीवनशैली पर दिया विशेष जोर
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। विश्व हेपेटाइटिस डे के अवसर पर लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट एवं आयुष मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में निहारिका रोड स्थित पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय, महानदी कॉम्प्लेक्स में निःशुल्क आयुर्वेद एवं योग चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस (यकृत शोथ) जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना, समय पर उपचार की जानकारी देना तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। शिविर में बड़ी संख्या में अंचलवासियों ने भाग लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त किया।
शिविर में छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, डॉ. खुर्शीद खान (धरमजयगढ़), डॉ. सोमेश कुशवाहा (पेंड्रा) तथा डॉ. सुरेंद्र मिश्रा (पंतोरा) ने अपनी सेवाएं प्रदान करते हुए लोगों को लिवर संबंधी रोगों की रोकथाम एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि हेपेटाइटिस एक ऐसा रोग है जो यकृत (लिवर) में सूजन और संक्रमण उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक तैलीय और पित्तवर्धक भोजन, अनियमित खान-पान तथा अधिक भोजन करना लिवर संबंधी समस्याओं के प्रमुख कारण बन सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि आंखों एवं त्वचा का पीला पड़ना, अत्यधिक थकान, भूख कम लगना, गहरे रंग का मूत्र, उल्टी, पेट दर्द या सूजन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
धरमजयगढ़ से आए डॉ. खुर्शीद खान ने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए नशामुक्त जीवन सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। उन्होंने लोगों से तंबाकू और शराब जैसी आदतों से दूर रहकर संतुलित दिनचर्या अपनाने की अपील की।
पेंड्रा से पहुंचे डॉ. सोमेश कुशवाहा ने सात्विक एवं संतुलित भोजन को स्वस्थ लिवर का आधार बताते हुए कहा कि प्राकृतिक, पौष्टिक एवं सुपाच्य आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और यकृत को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं डॉ. सुरेंद्र मिश्रा ने योग और प्राणायाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नियमित रूप से कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भुजंगासन सहित अन्य योगाभ्यास करने से लिवर की कार्यक्षमता बेहतर होती है तथा शरीर से विषैले तत्वों के निष्कासन में सहायता मिलती है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को दैनिक जीवन में योग को शामिल करने का संदेश दिया।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को लिवर स्वास्थ्य के लिए उपयोगी यकृत बूस्टर क्वाथ का निःशुल्क वितरण एवं सेवन कराया गया। साथ ही हेपेटाइटिस से बचाव, लक्षण, उपचार और स्वस्थ जीवनशैली संबंधी उपयोगी जानकारी वाली स्वास्थ्य पुस्तिकाएं भी निःशुल्क वितरित की गईं।
कार्यक्रम में डॉ. प्रवीण श्रीवास, डॉ. विवेक साहू, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, नेत्रनन्दन साहू, अश्वनी बुनकर, कमल धारिया, अरुण मानिकपुरी, देवबली कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, अनुराग, भानु प्रताप, पंचकर्म टेक्नीशियन गुनगुन राठिया, पिंकी बरेठ तथा शैल कुमारी निषाद सहित अनेक सहयोगियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को गंभीर बीमारियों के प्रति समय रहते सचेत करना तथा आयुर्वेद, योग और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में सकारात्मक पहल करना है।


