टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान से बदल रही पशुपालन की तस्वीर, कोरबा में पशुधन सुरक्षा का बना नया मॉडल
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। बारिश के मौसम में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुधन विभाग द्वारा चलाया जा रहा सघन गलघोंटू एवं एक टांगीया टीकाकरण अभियान पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पशु औषधालय अजगरबहार की टीम गांव-गांव पहुंचकर निःशुल्क टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है, जिससे पशुपालकों में जागरूकता बढ़ी है और पशुधन को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है।

पशुधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में गलघोंटू और एक टांगीया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर टीकाकरण पशुओं के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। विभाग द्वारा लगातार शिविर लगाकर अधिक से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है, ताकि बीमारी फैलने की आशंका को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।
इस अभियान की खास बात यह है कि टीकाकरण के साथ-साथ मादा गाय एवं भैंसों में हीट सिंक्रोनाइजेशन का कार्य भी किया जा रहा है। इससे पशुपालकों को बेहतर प्रजनन प्रबंधन की सुविधा मिल रही है और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है। विभाग ने इच्छुक पशुपालकों से अपील की है कि वे अपनी मादा गाय एवं भैंसों का पंजीयन नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था में कराएं और इस योजना का लाभ उठाएं।
वहीं पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए विभाग द्वारा उन्नत नस्ल के सीमेन से बकरियों में भी कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है। इस नवाचार का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है और कृत्रिम गर्भाधान से उत्पादित बकरी के बच्चे ने पशुपालकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बकरियों की नस्ल सुधार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पशुधन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपने पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने तथा विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग से अभियान को सफल बनाने की अपील की है। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक, समय पर टीकाकरण और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर पशुपालक अपनी आय में वृद्धि करने के साथ-साथ पशुधन को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।
बारिश के मौसम में टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान का यह संयुक्त अभियान कोरबा जिले में पशुधन विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


