“डेढ़ दशक की मन्नतें मातम में बदलीं : जुड़वा बच्चों के जन्म के कुछ घंटों बाद नवजात की मौत, आखिर किसकी लापरवाही ने उजाड़ दी परिवार की खुशियां?”



दोनों नवजात स्वस्थ पैदा हुए तो फिर अचानक कैसे बिगड़ी हालत? आयुष्मान चिकित्सालय के इलाज पर उठे गंभीर सवाल, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद दर्दनाक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शादी के करीब डेढ़ दशक बाद जुड़वा बच्चों के जन्म से खुशी से झूम रहे एक परिवार की खुशियां महज कुछ घंटों में मातम में बदल गईं। जन्म के बाद एक नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। अब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मामला शारदा विहार स्थित आयुष्मान चिकित्सालय का है। जानकारी के अनुसार, परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को अस्पताल में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। परिवार के मुताबिक दोनों नवजातों का वजन सामान्य और स्वास्थ्य संतोषजनक था। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद घर में आई दोहरी खुशियों का जश्न अभी शुरू ही हुआ था कि कुछ घंटों बाद एक बच्चे की तबीयत बिगड़ने की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दोनों बच्चे स्वस्थ अवस्था में पैदा हुए थे तो फिर अचानक एक नवजात की हालत क्यों बिगड़ी? क्या जन्म के बाद नवजात की उचित निगरानी नहीं की गई? क्या समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय उपचार नहीं मिला? क्या अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी थी? या फिर इलाज में कोई चूक हुई? इन तमाम सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उन्हें अपने नवजात को खोना पड़ा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। यदि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही या चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।
एक नवजात की मौत केवल एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है। प्रशासन को चाहिए कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और जन्म के बाद दी गई चिकित्सा प्रक्रिया की गहन जांच कर सच्चाई को सामने लाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब दोनों नवजात स्वस्थ पैदा हुए थे, तो आखिर वह कौन सी चूक थी जिसने एक मासूम की सांसें छीन लीं? इसका जवाब और दोषियों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।


