भक्ति और आस्था से सराबोर हुआ कोरबा, भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ



स्व. सुंदर लाल कर्ष की पुण्य स्मृति में आठ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक लिया धर्म लाभ
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। शहर में बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की अद्भुत छटा देखने को मिली। स्वर्गीय सुंदर लाल कर्ष की पुण्य स्मृति में आयोजित आठ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं वार्षिक श्राद्ध कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों एवं श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।

सीतामढ़ी चौक स्थित कथा स्थल से प्रारंभ हुई कलश यात्रा गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच श्री सप्तदेव मंदिर पहुंची। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालु महिलाओं ने विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया। इसके बाद श्रद्धालुओं की शोभायात्रा पुनः कथा स्थल पहुंची, जहां कलश यात्रा का विधिवत समापन किया गया।
श्री सप्तदेव मंदिर पहुंचने पर मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी एवं पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया तथा प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित तारेंद्र कृष्ण महाराज का भी पुष्पमालाओं से अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त कर आगामी कथा आयोजन की मंगल कामना की।
कलश यात्रा में मुख्य यजमान विकास निर्मलकर (विक्की), सारिका निर्मलकर, प्रमोद निर्मलकर, गायत्री, फिरबाई एवं हेमपुष्पा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग में “राधे-राधे”, “जय श्रीराम” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से वातावरण भक्तिरस में डूबा रहा। महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर निकाली गई शोभायात्रा श्रद्धा और सनातन परंपरा का सुंदर प्रतीक बनी।

आयोजकों ने जानकारी दी कि 15 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कथा व्यास पंडित तारेंद्र कृष्ण महाराज श्रीमद्भागवत महापुराण के दिव्य प्रसंगों का रसपान कराएंगे। कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।
आयोजन समिति ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने तथा धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान की कथा का श्रवण जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शांति और संस्कारों के संरक्षण का माध्यम है।
आठ दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक आयोजन कोरबा में आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।


