रेलवे की लापरवाही से जलभराव का संकट, स्टेशन के नाम पर भी ग्रामीणों का आक्रोश… समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कटघोरा/कोरबा। दक्षिण पूर्व रेलवे की दीपका–पेंड्रा रेल परियोजना अब प्रभावित ग्रामीणों के लिए सुविधा से अधिक परेशानी का कारण बनती जा रही है। एक ओर ओवरब्रिज के नीचे हर बारिश में जलभराव और कीचड़ से आवागमन ठप हो रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बन रहे रेलवे स्टेशन का नाम कटघोरा रखे जाने का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। इन दोनों गंभीर मुद्दों को लेकर प्रभावित ग्रामवासियों ने दो माह पूर्व जिला कलेक्टर, रेलवे मंडल प्रबंधक एवं संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा और जवाली के बीच बनाए गए रेलवे ओवरब्रिज में वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। वर्ष 2025 की तरह इस वर्ष भी बारिश के बाद ओवरब्रिज के नीचे घुटनों तक पानी और कीचड़ जमा हो गया है। रेलवे द्वारा कंक्रीटीकरण तो किया गया, लेकिन जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्या पहले से अधिक गंभीर हो गई है।

इस जलभराव से मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा, फुलझर, देवगांव, बतारी, नेहरू नगर, डोंगरी, तिलवारी, जवाली सहित लगभग दस गांवों के हजारों ग्रामीण प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, शिक्षक, किसान, मजदूर, महिलाएं, व्यापारी और पावर प्लांट तथा कोल वाशरी में कार्यरत कर्मचारी रोजाना इसी कीचड़युक्त मार्ग से जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। दोपहिया से लेकर स्कूल बस और अन्य छोटे-बड़े वाहन भी इस मार्ग से गुजरने में भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
दूसरा बड़ा विवाद रेलवे स्टेशन के नाम को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर स्टेशन का निर्माण हुआ है, वह जवाली क्षेत्र की भूमि पर स्थित है, जबकि उसका नाम कटघोरा स्टेशन रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान, आदिवासी संस्कृति और स्थानीय अस्मिता की अनदेखी हो रही है। ग्रामीणों की मांग है कि स्टेशन का नाम “जवाली रेलवे स्टेशन” रखा जाए, ताकि क्षेत्र की पहचान और सम्मान बना रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि दो माह पहले जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों ने संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपकर दोनों समस्याओं के समाधान की मांग की थी, लेकिन अब तक न जलभराव की समस्या का समाधान हुआ और न ही स्टेशन के नामकरण पर कोई निर्णय लिया गया। इससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रभावित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई और स्टेशन के नामकरण के संबंध में स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया गया, तो वे व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि भविष्य में यदि जलभराव के कारण कोई दुर्घटना होती है या जनहानि होती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।


