August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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ऊर्जा नगरी कोरबा का कड़वा सच: अंधेरे में डूबा तुमान गांव, पानी की बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण

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कागजों में विकास, जमीन पर बदहाली — ट्रांसफार्मर फेल, पानी बंद, भीषण गर्मी में तड़प रहे लोग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा/तुमान। देश को बिजली देने वाला कोरबा आज खुद अपने गांवों को रोशन नहीं कर पा रहा है। ऊर्जा नगरी कहलाने वाले जिले का तुमान गांव इन दिनों भीषण बिजली और पेयजल संकट से जूझ रहा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि गांव के लोग दिन में पानी के लिए भटक रहे हैं और रातभर गर्मी से तड़पते हुए जागने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन के विकास के दावे यहां पूरी तरह बेमानी साबित होते दिखाई दे रहे हैं।
गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। ग्रामीण लगातार खराब ट्रांसफार्मर बदलने की मांग कर रहे थे, लेकिन विभाग ने स्थायी समाधान करने के बजाय पुराना और कमजोर ट्रांसफार्मर लगाकर खानापूर्ति कर दी। नतीजा यह हुआ कि पूरे गांव में गंभीर लो वोल्टेज की समस्या पैदा हो गई। हालत यह है कि पंखे नाम मात्र के लिए घूम रहे हैं, कूलर बंद पड़े हैं और फ्रिज सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं।
सबसे बड़ी मार पेयजल संकट ने लोगों पर डाली है। लो वोल्टेज के कारण बोर मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे गांव में पानी का संकट विकराल रूप ले चुका है। तालाब पहले ही सूख चुके हैं और अब बोरवेल भी जवाब दे चुके हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है। कई परिवार घंटों मशक्कत कर किसी तरह पानी जुटा पा रहे हैं। भीषण गर्मी में यह संकट लोगों के लिए अभिशाप बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग और प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव पहुंचा और न ही समस्या का गंभीर समाधान किया गया। लोगों का कहना है कि विभाग सिर्फ कागजों में काम दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।
सबसे बड़ा सवाल हाल ही में लगाए गए “जन समस्या निवारण शिविर” पर उठ रहा है। शासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान होगा, लेकिन तुमान गांव की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली और पानी जैसी बुनियादी समस्याएं भी हल नहीं हो पा रहीं, तो ऐसे शिविर केवल फोटो सेशन और सरकारी प्रचार तक सीमित होकर रह गए हैं।
गांव में लगातार बढ़ते संकट से लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि जब कोरबा पूरे प्रदेश और देश को बिजली देने वाला जिला है, तो उसी जिले के गांव अंधेरे में क्यों डूबे हैं? आखिर ऊर्जा नगरी के लोगों को ही बिजली और पानी के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है? यह सवाल अब सीधे व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं।
गर्मी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। रातभर बिजली नहीं रहने और उमस के कारण लोग सो नहीं पा रहे। दिन में पानी की तलाश और रात में अंधेरे व गर्मी की मार ने ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और विद्युत विभाग से तत्काल नया ट्रांसफार्मर लगाने, बिजली आपूर्ति सुधारने और पेयजल संकट दूर करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो गांववासी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ऊर्जा नगरी में अंधेरा आखिर कब तक?
कोरबा की धरती से निकलने वाली बिजली जहां बड़े शहरों और उद्योगों को रोशन कर रही है, वहीं तुमान जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन विकास दावों पर बड़ा सवाल है जो वर्षों से कागजों में चमकते रहे

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