पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच साइकिल और पैदल चलना बना स्वास्थ्य का नया मंत्र : योगाचार्य दुर्गेश राठौर



स्वास्थ्य लाभ के साथ आर्थिक बचत और पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बन रही साइकिलिंग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है। रोजमर्रा के खर्चों के बीच अब लोग वैकल्पिक साधनों की ओर तेजी से ध्यान देने लगे हैं। ऐसे समय में साइकिल चलाना और छोटी दूरी पैदल तय करना न केवल आर्थिक राहत देने वाला विकल्प बनकर उभरा है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। योगाचार्य दुर्गेश राठौर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता अनेक गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है, जिसे साइकिलिंग और पैदल चलने जैसी सरल आदतों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
योगाचार्य दुर्गेश राठौर ने कहा कि आज अधिकांश लोग छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए भी मोटरसाइकिल या कार का उपयोग कर रहे हैं। इससे एक ओर जहां ईंधन खर्च बढ़ रहा है, वहीं शरीर को आवश्यक शारीरिक गतिविधि भी नहीं मिल पा रही। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से साइकिल चलाने और पैदल चलने से शरीर सक्रिय रहता है, रक्त संचार बेहतर होता है तथा हृदय मजबूत बनता है। इसके अलावा यह मानसिक तनाव कम करने और शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों की बदलती जीवनशैली और शारीरिक श्रम की कमी है। यदि लोग प्रतिदिन कुछ दूरी पैदल चलने और साइकिल उपयोग करने की आदत डालें, तो इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
योगाचार्य दुर्गेश राठौर ने यह भी बताया कि विशेषज्ञों और विभिन्न अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि नियमित साइकिलिंग और पैदल चलना स्वास्थ्य सुधारने के साथ-साथ प्रदूषण कम करने में भी सहायक है। इससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति छोटी दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने का संकल्प ले, तो इससे देश की आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में साइकिल को केवल गरीब का साधन न समझें, बल्कि इसे स्वस्थ जीवनशैली का प्रतीक बनाएं। आज देश के कई हिस्सों में लोग फिटनेस और आर्थिक बचत दोनों के उद्देश्य से फिर से साइकिल की ओर लौट रहे हैं। आने वाले समय में यह आदत समाज को स्वस्थ, जागरूक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


