गेवरा परियोजना में श्रमिकों का फूटा आक्रोश: “स्थानीयों का हक छीना तो बंद होगा काम”



जिला पंचायत सदस्य विनोद कुमार यादव ने उठाए गंभीर सवाल, पीएनसी इंफ्राटेक पर श्रमिक शोषण और बाहरी लोगों को रोजगार देने के आरोप
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा/दीपका। एसईसीएल की मेगा गेवरा परियोजना में कार्यरत ठेका कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ अब स्थानीय युवाओं और श्रमिकों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय बेरोजगारों की अनदेखी, बाहरी लोगों को रोजगार देने, मजदूरों से अत्यधिक काम लेने और श्रम कानूनों की अनदेखी के आरोपों ने पूरे क्षेत्र में माहौल गरमा दिया है। मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं समिति सदस्य विनोद कुमार यादव ने गंभीर जानकारी देते हुए कंपनी और एसईसीएल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड पिछले कई महीनों से गेवरा परियोजना अंतर्गत मिट्टी और कोयला उत्खनन कार्य कर रही है। आरोप है कि कंपनी द्वारा स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे प्रभावित गांवों के युवाओं में भारी नाराजगी व्याप्त है।
जिला पंचायत सदस्य विनोद कुमार यादव ने बताया कि कंपनी में कार्यरत ड्राइवर, सुपरवाइजर, मशीन ऑपरेटर, हेल्पर और अन्य कर्मचारियों की सूची तक सार्वजनिक नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब परियोजना का सबसे अधिक प्रभाव आसपास के गांवों पर पड़ रहा है, तो रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
“स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं”
विनोद कुमार यादव ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर स्थानीय लोगों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कंपनी का काम बंद कराने की दिशा में आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। परियोजना क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए और कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक की जाए।
मजदूरों से 12 घंटे काम, वेतन कम देने के आरोप
मामले में श्रमिक शोषण के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, कोयला उत्खनन कार्य में लगे ड्राइवरों और कर्मचारियों से 12-12 घंटे तक काम कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा। विरोध करने पर नौकरी से निकालने और दबाव बनाकर काम कराने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
इन आरोपों के बाद श्रमिकों और कर्मचारियों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो गेवरा परियोजना में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन को भेजा गया ज्ञापन
मामले को लेकर महाप्रबंधक, एसईसीएल गेवरा क्षेत्र को ज्ञापन सौंपा गया है। इसकी प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा, एसडीएम कटघोरा, तहसीलदार दीपका और थाना प्रभारी हरदीबाजार को भी भेजी गई है। ज्ञापन में साफ कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और काम बंद कराने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी।
स्थानीय स्तर पर इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गेवरा परियोजना में उठे इस विवाद ने अब क्षेत्र की राजनीति और श्रमिक संगठनों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है।


