August 23, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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सीईओ दिनेश कुमार नाग के खिलाफ अध्यक्ष पवन सिंह, सदस्य रेणुका राठिया समेत जनप्रतिनिधियों का हल्लाबोल, जिला पंचायत में घंटों चला धरना-प्रदर्शन

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// कोरबा12 मई 2026
कोरबा जिला पंचायत मंगलवार को भारी राजनीतिक भूचाल का केंद्र बन गया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया समेत जिला पंचायत और जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। मुख्य द्वार पर धरना देकर जनप्रतिनिधियों ने जमकर नारेबाजी की और सीईओ पर तानाशाही, कमीशनखोरी, योजनाओं में मनमानी और निर्वाचित प्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
“सीईओ सामने आओ”, “भ्रष्टाचार बंद करो”, “जनप्रतिनिधियों का अपमान बंद करो” जैसे नारों से पूरा जिला पंचायत परिसर देर तक गूंजता रहा। विरोध प्रदर्शन इतना उग्र रहा कि जिला पंचायत का कामकाज प्रभावित हो गया और शासी परिषद की बैठक का बहिष्कार कर दिया गया।

 

“20-25 साल में ऐसा अधिकारी नहीं देखा” — पवन सिंह
जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने बेहद आक्रामक अंदाज में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपने 20-25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में कई सीईओ और अधिकारी देखे हैं, लेकिन ऐसा रवैया पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य सभा को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया गया है।
पवन सिंह ने कहा कि पंचायतों में जनता प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है, लेकिन अधिकारी उनकी बात तक सुनना जरूरी नहीं समझ रहे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा तथा जरूरत पड़ी तो जिला पंचायत कार्यालय में ताला तक जड़ दिया जाएगा।
रेणुका राठिया का हमला — “यह सिर्फ विरोध नहीं, पूरे सिस्टम की सच्चाई है”

 

जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया ने भी सीधा हमला बोलते हुए कहा कि विकास कार्यों में खुलेआम भ्रष्टाचार और कथित कमीशनखोरी की चर्चा हो रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल चुप्पी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मनमानी इस हद तक बढ़ गई है कि जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
रेणुका राठिया ने कहा कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और जनपद प्रतिनिधि एक साथ खड़े होकर सवाल उठा रहे हैं, तब यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर सच्चाई को उजागर करता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
ऊपर तक देना पड़ता है…” — आरोपों से मचा हड़कंप
धरने के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों और योजनाओं में कथित रूप से प्रतिशत तय है और बिना “ऊपर तक हिस्सा पहुंचाए” फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। इन आरोपों ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
जनप्रतिनिधियों ने दावा किया कि विकास कार्यों में कथित रूप से “5 प्रतिशत कमीशन” लिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह खुले मंच से निर्वाचित प्रतिनिधियों ने आक्रोश व्यक्त किया, उसने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और चर्चित बना दिया है।
तीन घंटे इंतजार, फिर फूटा गुस्सा
जानकारी के अनुसार जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग को बैठक के लिए बुलाया गया था, जहां विकास कार्यों और योजनाओं पर चर्चा होनी थी। आरोप है कि करीब तीन घंटे तक इंतजार कराने के बावजूद सीईओ बैठक में नहीं पहुंचे। इससे नाराज जनप्रतिनिधि धरने पर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बताया गया कि बाद में जब सवाल पूछे गए तो कथित तौर पर “क्या सबूत है आपके पास?” जैसे जवाबों ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया। इसके बाद जिला पंचायत परिसर में जमकर नारेबाजी शुरू हो गई।
डीएमएफ फंड और योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल
धरने में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। देर शाम तक जिला पंचायत परिसर में भारी गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा। यह पूरा घटनाक्रम अब कोरबा की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े विवाद के रूप में देखा जा रहा है।

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