अपरा एकादशी 13 मई को, व्रत-पूजन से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का विधान : पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// कोरबा। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पवित्र अपरा एकादशी इस वर्ष 13 मई 2026, बुधवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को पापों से मुक्ति, पुण्य की प्राप्ति तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई 2026, मंगलवार को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट से होगा तथा इसका समापन 13 मई 2026, बुधवार को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार अपरा एकादशी व्रत 13 मई को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 14 मई 2026, गुरुवार को प्रातः 06 बजकर 04 मिनट से 08 बजकर 41 मिनट के मध्य किया जाएगा।
पंडित शर्मा ने बताया कि अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना, व्रत, जप-तप एवं दान-पुण्य का विधान है। श्रद्धालु प्रातः स्नान कर भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन करते हैं तथा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए दिनभर व्रत रखते हैं।
उन्होंने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित अपरा एकादशी व्रत कथा का श्रवण भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से इस व्रत को करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
कथा में वर्णन मिलता है कि प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज अत्यंत क्रूर और अधर्मी था। द्वेषवश उसने अपने बड़े भाई की हत्या कर उसकी देह जंगल में पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दी। अकाल मृत्यु के कारण राजा प्रेत योनि में चला गया और उसी वृक्ष पर निवास कर उत्पात मचाने लगा।
एक दिन धौम्य ऋषि वहां पहुंचे और अपने तपोबल से राजा की पीड़ा को जान लिया। ऋषि ने राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए अपरा एकादशी का व्रत किया तथा व्रत का पुण्य फल उसे समर्पित कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से राजा प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य स्वरूप धारण कर स्वर्ग को प्रस्थान कर गया।
पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कही गई यह कथा लोककल्याण के लिए है। अपरा एकादशी का व्रत, कथा श्रवण और भगवान विष्णु की आराधना करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा उसे सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।


