गरीबों की रोजी पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे” : बांकी मोंगरा में सब्जी बाजार हटाने के विरोध में फूटा आक्रोश, 12 मई को नगर पालिका घेराव का ऐलान



“जेल भेजने की धमकी देकर डराया जा रहा, गजरा बस्ती की जाम बाई जैसा हाल करने की चेतावनी” — सब्जी विक्रेताओं का आरोप
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// बांकी मोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा द्वारा स्थानीय डेली सब्जी बाजार को हटाने और वहां निर्माण कार्य कराए जाने की तैयारी को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। वर्षों से बाजार लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले सब्जी विक्रेताओं ने प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने, डराने-धमकाने और गरीबों की रोजी-रोटी छीनने का आरोप लगाया है।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा उन्हें लगातार बाजार खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर जेल भेजने तक की धमकी दी जा रही है। विक्रेताओं का आरोप है कि उन्हें कहा जा रहा है कि यदि बाजार नहीं हटाया गया तो गजरा बस्ती निवासी जाम बाई और उनके सहयोगियों जैसा हाल किया जाएगा। इस चेतावनी के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा नियमानुसार नोटिस हाथों में देने के बजाय रात के अंधेरे में या गुपचुप तरीके से नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। इससे यह साफ दिखाई दे रहा है कि प्रशासन खुलकर संवाद करने के बजाय दबाव और भय का वातावरण बनाकर बाजार खाली कराना चाहता है।
“यह बाजार नहीं, सैकड़ों परिवारों की जीवनरेखा है”
स्थानीय लोगों का कहना है कि बांकी मोंगरा का डेली सब्जी बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सैकड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। यहां वर्षों से लोग छोटे-छोटे व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि विकास के नाम पर गरीबों के पेट पर लात मारना किसी भी हालत में उचित नहीं कहा जा सकता। जिस स्थान पर निर्माण प्रस्तावित है, वहां विधायक प्रेमचंद पटेल द्वारा भूमिपूजन भी किया जा चुका है, लेकिन अब इस निर्माण को लेकर कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन द्वारा बताए जा रहे वैकल्पिक स्थान को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि प्रस्तावित नया स्थान सड़क के दूसरी ओर है, जहां छोटे बच्चों और महिलाओं को आवाजाही में भारी परेशानी होगी।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि छोटे-छोटे बच्चे सड़क पार कर आंगनबाड़ी या बाजार जाएंगे और किसी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों का कहना है कि प्रशासन विकास की बात तो कर रहा है, लेकिन सुरक्षा और जनसुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
एसईसीएल की एनओसी को लेकर भी बड़ा विवाद
मामले में अब एसईसीएल की एनओसी को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बांकी मोंगरा क्षेत्र मुख्य रूप से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की लीज भूमि के अंतर्गत आता है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने पूछा है कि जिस निर्माण कार्य की तैयारी की जा रही है, क्या उसके लिए एसईसीएल से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया गया है?
लोगों का कहना है कि यदि एनओसी नहीं ली गई है, तो निर्माण कार्य की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है।
12 मई को नगर पालिका परिषद का घेराव
प्रशासन की कथित एकतरफा कार्रवाई के विरोध में अब सब्जी विक्रेता संघ ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने 12 मई को नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि वर्षों पुराने सब्जी बाजार को यथावत रखा जाए और बाजार को उजाड़ने की योजना तत्काल बंद की जाए।
“हम विकास विरोधी नहीं, लेकिन गरीबों को उजाड़ना गलत” — भागवत विश्वकर्मा
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भागवत विश्वकर्मा ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों के रोजगार को खत्म करना और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा करनी चाहिए थी। बिना सहमति और वैकल्पिक व्यवस्था के गरीब परिवारों को उजाड़ने की कोशिश कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।
बांकी मोंगरा में सब्जी बाजार को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और व्यापारियों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


