May 9, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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इंटक-एटक को कुसमुंडा में बड़ा झटका लगभग 200 मजदूरों ने छोड़ा साथ, बीएमएस में शामिल होकर बदले श्रमिक राजनीति के समीकरण

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**//  कोरबा। एसईसीएल की मेगा परियोजना कुसमुंडा क्षेत्र की श्रमिक राजनीति में शनिवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब इंटक और एटक यूनियन से जुड़े लगभग 200 मजदूरों ने एक साथ भारतीय मजदूर संघ समर्थित भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ (बीएमएस) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने कोयला क्षेत्र की यूनियन राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे आने वाले समय में श्रमिक संगठनों के बदलते शक्ति संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।
कुसमुंडा स्थित बीएमएस कार्यालय में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में भारी संख्या में श्रमिकों की मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया कि मजदूरों के बीच अब नई सोच और नए नेतृत्व को लेकर विश्वास बढ़ रहा है। कार्यक्रम के दौरान मजदूरों ने खुलकर कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को लेकर पारंपरिक यूनियनें केवल आश्वासन देती रहीं, लेकिन जमीनी स्तर पर श्रमिक हितों की लड़ाई कमजोर पड़ती गई। इसी नाराजगी के चलते बड़ी संख्या में मजदूरों ने संगठन बदलने का फैसला लिया।
कार्यक्रम में बीएमएस पदाधिकारियों ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन हमेशा मजदूरों के अधिकार, सुरक्षा, वेतन, सुविधाओं और सम्मान की लड़ाई मजबूती से लड़ता आया है। उन्होंने दावा किया कि बीएमएस केवल चुनावी राजनीति नहीं बल्कि श्रमिकों के वास्तविक मुद्दों पर संघर्ष करने वाला संगठन है, यही वजह है कि मजदूर लगातार संगठन से जुड़ रहे हैं।
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि कुसमुंडा, गेवरा और आसपास के कोयला क्षेत्रों में श्रमिकों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें कार्यस्थल की सुरक्षा, ठेका श्रमिकों के अधिकार, आवास, चिकित्सा सुविधा और श्रमिक हितों से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। इन समस्याओं को लेकर बीएमएस आने वाले समय में और आक्रामक रणनीति अपनाएगा।
कार्यक्रम का संचालन अमिया मिश्रा ने किया। इस दौरान यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री टिकेश्वर राठौर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और श्रमिक उपस्थित रहे। नए सदस्यों ने संगठन के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए श्रमिक एकता को मजबूत करने तथा मजदूर हितों की लड़ाई को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
राजनीतिक और श्रमिक हलकों में इस घटनाक्रम को इंटक और एटक के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि इसी तरह मजदूरों का रुझान बदलता रहा तो आने वाले दिनों में कुसमुंडा क्षेत्र की यूनियन राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

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