🚩 “ननिहाल आए बागेश्वर सरकार” — उरगा-छुरी में ऐतिहासिक स्वागत, ढपढप में हनुमंत कथा के पहले दिन उमड़ा आस्था का महासैलाब



मामा-भांजे के स्नेह जैसा मिला अपनापन, छत्तीसगढ़ की धरती पर उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने रचा भक्ति, श्रद्धा और सनातन चेतना का नया अध्याय
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा/उरगा/छुरी/बाकीमोगरा/ढपढप।
बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज के कोरबा आगमन ने पूरे क्षेत्र को भक्ति, श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। जैसे ही महाराज श्री रायगढ़ से कोरबा की ओर अग्रसर हुए, वैसे ही श्रद्धालुओं की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उरगा और छुरी में उनका भव्य, आकर्षक और ऐतिहासिक स्वागत किया गया, वहीं इसके बाद बाकीमोगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप में शुरू हुई दिव्य श्री हनुमंत कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं का ऐसा महासैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्ति के महासागर में डूबा नजर आया।
इस पूरे आयोजन की सबसे आत्मीय और भावनात्मक अनुभूति यह रही कि श्रद्धालुओं के बीच बार-बार यह भावना मुखरित होती रही कि

“छत्तीसगढ़, बागेश्वर धाम सरकार का ननिहाल है।”
और सच भी यही प्रतीत हुआ। जिस प्रकार ननिहाल में मामा-भांजे के रिश्ते जैसा अपनापन, स्नेह, प्रेम और आत्मीयता देखने को मिलती है, ठीक उसी भाव से छत्तीसगढ़ की जनता ने महाराज श्री का हृदय से स्वागत और अभिनंदन किया।
श्रद्धालुओं का उमड़ा प्रेम यह स्पष्ट कर रहा था कि यह केवल एक आगमन नहीं, बल्कि अपने ही घर लौटने जैसा भावनात्मक मिलन है।
सबसे पहले उरगा चौक में श्रद्धालुओं का भारी जनसमूह उमड़ पड़ा। भगवा ध्वज, पुष्पमालाएं, जय श्रीराम के उद्घोष, बजरंगबली के जयकारे और भक्ति से भरे चेहरों के बीच महाराज श्री का ऐसा अभिनंदन हुआ, जिसने पूरे वातावरण को धर्ममय, ऊर्जावान और भक्तिमय बना दिया। इसके बाद छुरी में भी श्रद्धालुओं ने उसी उत्साह, उसी श्रद्धा और उसी भव्यता के साथ उनका स्वागत किया। दोनों स्थानों पर दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, उमंग और आस्था ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की जनता के हृदय में बागेश्वर धाम सरकार के प्रति कितना गहरा प्रेम और सम्मान है।
इसके बाद जब महाराज श्री बाकीमोगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप पहुंचे, तो वहां का दृश्य और भी अलौकिक हो उठा। दिव्य श्री हनुमंत कथा के पहले ही दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर जय श्रीराम, जय हनुमान और बागेश्वर धाम सरकार की जय के उद्घोष से थर्रा उठा।
ढपढप की पावन धरती पर चल रही यह कथा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि यह सनातन जागरण, हनुमान भक्ति, सांस्कृतिक गौरव और हिंदू एकता का विराट मंच बन चुकी है।
कथा के प्रथम दिवस पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने अपने ओजस्वी, प्रभावशाली और भावपूर्ण प्रवचन में हनुमानजी की महिमा, भक्ति की शक्ति, सनातन धर्म की महानता, पारिवारिक संस्कार, धर्म रक्षा, राष्ट्र चेतना और हिंदू समाज की एकता पर विस्तृत प्रकाश डाला।
उनकी वाणी में जहां भक्ति की मधुरता थी, वहीं धर्म जागरण की तेजस्विता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु पूरे समय मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे और बार-बार जयकारों से अपनी आस्था व्यक्त करते रहे।
विशेष बात यह रही कि पहले ही दिन इतनी विशाल भीड़ उमड़ी कि आयोजन स्थल आस्था के महासागर में परिवर्तित हो गया।
महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे — हर वर्ग के श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा में शामिल हुए।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखकर यह सहज ही अनुभव हुआ कि छत्तीसगढ़ की धरती वास्तव में धर्म, भक्ति और संत परंपरा के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाली भूमि है।
लोगों के उत्साह को देखकर कई श्रद्धालुओं के मुख से यह भाव भी निकला कि
“ऐसी भीड़ और ऐसा प्रेम केवल छत्तीसगढ़ ही दे सकता है।”
कथा स्थल को भव्य धार्मिक स्वरूप देने के लिए आयोजन समिति द्वारा विशेष सजावट की गई है। भगवा ध्वजों से सुसज्जित परिसर, विशाल मंच, सुसंगठित पंडाल, भक्तिमय संगीत और आध्यात्मिक वातावरण ने पूरे क्षेत्र को एक दिव्य धाम का रूप दे दिया है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजन समिति द्वारा विशाल पंडाल, बैठने की व्यापक व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा, ग्रीन रूम, विश्राम स्थल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे पूरा आयोजन भव्यता, अनुशासन और सेवा भाव के साथ संचालित हो रहा है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि उरगा और छुरी में हुए ऐतिहासिक स्वागत तथा ढपढप में कथा के पहले ही दिन उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया है कि बागेश्वर धाम सरकार के प्रति छत्तीसगढ़ की आस्था कितनी गहरी, विशाल और आत्मीय है।
यह आयोजन अब केवल एक कथा नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, सनातन चेतना और सामाजिक एकता का एक ऐतिहासिक उत्सव बन चुका है।


