मुख्यमंत्री से मिले हथकरघा संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, 25 करोड़ की सौगात से बनेगा अपना भवन और गोदाम — बुनकरों के उत्थान को मिलेगी नई रफ्तार



पदभार ग्रहण के बाद पहली बार मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट, विभागीय गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर हुई
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित रायपुर के अध्यक्ष भोजराम देवांगन ने पदभार ग्रहण करने के पश्चात पहली बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को संघ की वर्तमान गतिविधियों, योजनाओं और बुनकरों के हित में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
भेंट के दौरान अध्यक्ष भोजराम देवांगन ने मुख्यमंत्री के समक्ष विभाग को और अधिक मजबूत एवं प्रगतिशील बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। उन्होंने बताया कि हथकरघा क्षेत्र से जुड़े हजारों बुनकरों के हितों को ध्यान में रखते हुए संघ की कार्यप्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिल सके।
इस दौरान संघ को आवंटित भूमि पर स्वयं का भवन और गोदाम निर्माण कराने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अनुमोदन प्रदान कर दिया, जिससे संघ के लिए अपना स्थायी कार्यालय भवन और गोदाम बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
संघ का स्वयं का भवन और गोदाम बनने से वर्तमान में किराए पर चल रहे कार्यालय और भंडारण व्यवस्था पर होने वाला हर महीने लाखों रुपये का खर्च बच सकेगा। यह बचत सीधे तौर पर प्रदेश के बुनकरों के उत्थान और हथकरघा उद्योग के विकास में उपयोग की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ का हथकरघा उद्योग राज्य की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार बुनकरों के हितों की रक्षा और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
अध्यक्ष भोजराम देवांगन ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सहयोग और मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ का हथकरघा क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और बुनकरों को रोजगार एवं सम्मानजनक जीवन का बेहतर अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री से हुई इस महत्वपूर्ण भेंट को छत्तीसगढ़ के हथकरघा उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि और बुनकरों के भविष्य को सशक्त बनाने वाला कदम माना जा रहा है।


