मन-तन की एकाग्रता से ही जीवन में मिलती है वास्तविक सफलता: स्वामी विभूदानंद कमला नेहरू महाविद्यालय में आर्ट ऑफ लिविंग की प्रेरक कार्यशाला, विद्यार्थियों को मिला जीवन प्रबंधन का मंत्र






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा सफल जीवन के लिए केवल बौद्धिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि मन और शरीर की एकाग्रता, संतुलन और प्रसन्नता भी उतनी ही आवश्यक है। पढ़ाई हो या कार्यक्षेत्र, जब तक व्यक्ति का मन शांत और शरीर ऊर्जावान नहीं होगा, तब तक वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकता। आर्ट ऑफ लिविंग जीवन को सहज, संतुलित और सकारात्मक बनाने की कला सिखाता है।
उक्त विचार आर्ट ऑफ लिविंग बैंगलुरु से पधारे स्वामी विभूदानंद ने शनिवार को कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग की कार्यशाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। यह कार्यशाला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
स्वामी विभूदानंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ध्यान, प्राणायाम और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को भीतर से सशक्त बनाती है। उन्होंने सरल उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता का महत्व समझाया।

कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के वरिष्ठ शिक्षक सत्यप्रकाश गुप्ता ने भी विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक जीवनशैली के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। वहीं अग्रसेन महाविद्यालय शिक्षण समिति के उपाध्यक्ष श्री श्याम अग्रवाल एवं शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. भारती कुलदीप ने इस तरह के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि कमला नेहरू महाविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाले कार्यक्रमों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शिक्षा संकाय के विद्यार्थी भविष्य में शिक्षक बनकर समाज को दिशा देंगे, इसलिए उनका मानसिक रूप से सशक्त, संतुलित और संस्कारित होना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने का मार्ग दिखाया, बल्कि जीवन को बेहतर, संतुलित और सफल बनाने की प्रेरणा भी प्रदान की।





