संघर्ष से सफलता की मिसाल: सरकारी नौकरी का सपना छोड़ पीएम रोजगार सृजन योजना से बेकरी उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बने आकाश कुमार डिक्सेना






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//* कोरबा 17 जनवरी 2026
जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम मुंगाडीह निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र आकाश कुमार डिक्सेना ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो परिस्थितियाँ भी रास्ता दे देती हैं। वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करने के बावजूद सफलता हाथ न लगने पर उन्होंने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया, बल्कि स्वरोजगार को अपनाकर आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गए हैं।
आकाश कुमार डिक्सेना ने स्कूली शिक्षा के पश्चात उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए एम.ए. (अंग्रेज़ी एवं संस्कृत) तथा बी.एड. की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएँ दीं, लेकिन सीमित वेतन और भविष्य की अनिश्चितता के कारण वे संतुष्ट नहीं थे। इसी दौरान उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (PMEGP) की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।

योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के बाद आकाश ने स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को सुरक्षित करने का निर्णय लिया। उन्होंने बेकरी उद्योग स्थापित करने हेतु लगभग 11 लाख रुपये का विस्तृत प्रोजेक्ट तैयार किया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत उन्हें बैंक के माध्यम से 9 लाख 90 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण प्राप्त होते ही उन्होंने अपने गृह ग्राम मुंगाडीह में आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेकरी उद्योग की स्थापना की।
वर्तमान में आकाश कुमार डिक्सेना अपनी बेकरी इकाई में ब्रेड, क्रीम रोल, बिस्किट सहित विभिन्न प्रकार के बेकरी उत्पादों का निर्माण कर स्थानीय बाजार में ही बिक्री कर रहे हैं। उनके उत्पादों को ग्रामीणों का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जिससे उन्हें नियमित और स्थायी आय प्राप्त हो रही है। इस बेकरी उद्योग के माध्यम से उन्होंने गांव के कुछ अन्य बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
इस उद्यम में आकाश को उनके पिता एवं माता का निरंतर सहयोग मिल रहा है, जो उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करता है। वे बताते हैं कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना ने न केवल उन्हें रोजगार दिया, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया।
आकाश कुमार डिक्सेना के अनुसार, वे वर्तमान में प्रतिमाह लगभग 15,300 रुपये की ऋण किस्त नियमित रूप से जमा कर रहे हैं और अपने व्यवसाय को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। आज वे गर्व के साथ कहते हैं कि यदि समय रहते उन्होंने स्वरोजगार का निर्णय नहीं लिया होता, तो शायद यह सफलता संभव नहीं होती।
आकाश कुमार डिक्सेना की यह सफलता कहानी आज उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा में हताश हो जाते हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वरोजगार से ही मजबूत होगी।





