February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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पहले श्रेष्ठ शिक्षार्थी, फिर आदर्श शिक्षक बनना ही सफलता की असली कसौटी : डॉ प्रशांत बोपापुरकर

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//* कोरबा एक प्रशिक्षार्थी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ सीखने की प्रक्रिया को अपनाए और अपने पाठ्यक्रम को गंभीरता से पूर्ण करे। ऐसा करने से न केवल वह एक कुशल और संवेदनशील शिक्षक बन सकता है, बल्कि अपने महाविद्यालय और गुरुजनों के नाम को भी गौरवान्वित कर सकता है। पहले एक अच्छा प्रशिक्षार्थी बनना और फिर एक आदर्श शिक्षक के रूप में समाज में अपनी पहचान बनाना—यही एक उत्कृष्ट, प्रेरणादायक और दीर्घकालिक लक्ष्य होना चाहिए।

 

 

यह विचार कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा के प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर ने गुरुवार को डीएलएड प्रथम वर्ष के दस दिवसीय संपर्क कक्षा सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहकर प्रशिक्षार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से आह्वान किया कि वे इस सीख को जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि भविष्य में स्वयं सक्षम शिक्षक बनने के साथ-साथ अपने विद्यार्थियों को भी योग्य, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बना सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएलएड प्रभारी एवं शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ भारती कुलदीप ने कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को सदैव अपने विद्यार्थियों के साथ समानता, संवेदनशीलता और सम्मान का व्यवहार करने की सीख दी तथा उन्हें रचनात्मक सोच विकसित करने और जीवन भर सीखने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
डॉ भारती कुलदीप ने जानकारी दी कि यह दस दिवसीय संपर्क कक्षा सह प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 जनवरी से 15 जनवरी तक आयोजित किया गया, जिसमें प्रशिक्षार्थियों को शिक्षण कौशल, व्यवहारिक ज्ञान एवं शैक्षणिक मूल्यों से परिचित कराया गया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ भारती कुलदीप, अंजू खेस, डॉ रश्मि शुक्ला, कुणाल दासगुप्ता, राकेश गौतम, नितेश यादव एवं शंकरलाल यादव उपस्थित रहे। प्रशिक्षार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों का श्रीफल एवं पुष्पमाला भेंटकर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
समापन समारोह को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने और भी आकर्षक बना दिया। सरस्वती वंदना महिमा एवं उर्वशी द्वारा प्रस्तुत की गई, जबकि स्वागत गीत उर्वशी एवं संध्या ने गाया। इसके अलावा विनीता, अनिल प्रधान एवं चित्रकांता ने भी मधुर गीतों की प्रस्तुति दी। प्रशिक्षार्थी उर्वशी श्रीवास, विकास राठौर एवं रूपेश कुमार ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन वर्षा पैकरा एवं देव राठिया ने किया, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी निधि सोनी ने कुशलतापूर्वक निभाई।
समापन समारोह ने प्रशिक्षार्थियों के मन में न केवल शिक्षक बनने की जिम्मेदारी का बोध कराया, बल्कि उन्हें अपने गुरुजनों के आदर्शों पर चलकर समाज को दिशा देने का संकल्प भी दिलाया।

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