February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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ठंड में सेवा की तपिश, मकर संक्रांति पर मानव सेवा मिशन ने पहाड़ी कोरवा बच्चों की ज़िंदगी में भरी नई गर्माहट

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा  सेवा, संवेदना और संस्कार के महापर्व मकर संक्रांति पर समाजसेवी संस्था मानव सेवा मिशन ने सुदूर वनांचल में मानवता की एक प्रेरक मिसाल पेश की। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच, मिशन ने अपने सेवा अभियान के सातवें चरण में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के ग्राम छातासरई में पहुँचकर बच्चों और बुजुर्गों के जीवन में स्नेह, सुरक्षा और आत्मीयता की ऊष्मा घोल दी।

 

 

दुर्गम जंगलों के बीच पहुँची सेवा की रौशनी
सतरेंगा रोड से अजगरबहार तहसील कार्यालय के भीतर लगभग 6 किलोमीटर दूर, घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दुर्गम परिस्थितियों के बीच बसे इस आदर्श ग्राम तक पहुँचना आसान नहीं था। इसके बावजूद मानव सेवा मिशन के सेवाभावी सदस्य कठिन राहों को पार कर प्राथमिक शाला एवं आंगनबाड़ी केंद्र पहुँचे। जैसे ही मिशन की टीम वहां पहुँची, बच्चों के चेहरों पर उत्साह और उम्मीद की चमक देखने लायक थी।

 

 

मिशन द्वारा गांव के स्कूली छात्र-छात्राओं सहित सभी छोटे बच्चों को नए व गर्म स्वेटर वितरित किए गए, वहीं ठंड से ठिठुरते बुजुर्गों को कंबल ओढ़ाकर सम्मानपूर्वक उनका आशीर्वाद लिया गया।
मुस्कुराते चेहरे बने सेवा की सबसे बड़ी सफलता
नए कपड़े पहनते ही बच्चों के चेहरों पर खिली निश्छल मुस्कान ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वनांचल के दूरस्थ इलाकों में इस प्रकार की संवेदनशील पहल बहुत कम देखने को मिलती है। मानव सेवा मिशन की यह सेवा उनके लिए केवल सहायता नहीं, बल्कि यह अहसास भी थी कि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़े हुए हैं।
सेवा में समर्पित रहे मिशन के सिपाही
इस मानवीय अभियान में मानव सेवा मिशन की ओर से
केशव चन्द्रा, राम सहाय पटेल, डीकेश्वर साहू, श्रीकांत वर्मा, सुशील देवांगन एवं लक्ष्मण दास ने सेवा भाव से अपनी सहभागिता निभाई।
वहीं माधुरी चन्द्रा, उमा पटेल, स्मिता पटेल एवं अल्का पृथ्वीकर ने नारी शक्ति के रूप में कार्यक्रम को आत्मीय और भावनात्मक स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में शाला के प्रधान पाठक विजयेंद्र यादव, शिक्षक धनेश भास्कर तथा आंगनबाड़ी शिक्षिका पेवती का विशेष योगदान रहा।
संवेदना ही सच्चा पर्व
मानव सेवा मिशन की यह पहल इस बात का जीवंत उदाहरण बनी कि पर्व तभी सार्थक होते हैं जब वे जरूरतमंदों के जीवन में खुशहाली और सुरक्षा लेकर आएं। पहाड़ी कोरवा बच्चों और बुजुर्गों के चेहरों पर दिखी संतुष्टि और मुस्कान ने इस सेवा को अविस्मरणीय बना दिया।
निष्कर्ष:
मानव सेवा मिशन द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल ठंड से राहत का माध्यम बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा उत्सव है।

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