उच्च न्यायालय की फटकार के बाद हरकत में आया प्रशासन, डीएमएफ घोटाले की जांच के लिए कोरबा पहुँचेगी संभागायुक्त की टीम






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की सख्ती और कड़ी टिप्पणियों के बाद आखिरकार जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग और कुप्रबंधन की जांच का रास्ता साफ हो गया है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बिलासपुर संभाग आयुक्त द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम कोरबा पहुंच रही है, जो डीएमएफ मद से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
संभाग आयुक्त कार्यालय द्वारा गठित इस विशेष जांच टीम में उपायुक्त (विकास) हरिशंकर चौहान, उपायुक्त (राजस्व) स्मृति तिवारी तथा लेखाधिकारी संभाग आयुक्त कार्यालय स्मिता पांडे को शामिल किया गया है। यह टीम कोरबा जिले में डीएमएफटी फंड के उपयोग, योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रक्रियाओं की गहन जांच करेगी।
कोयला मंत्रालय से शुरू हुआ मामला, महीनों तक दबाई गई फाइलें
जानकारी के अनुसार, कोरबा के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कोयला मंत्रालय, भारत सरकार में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कोरबा जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के व्यापक दुरुपयोग और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। कोयला मंत्रालय ने इस शिकायत को जांच हेतु छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को अग्रेषित किया।
मुख्य सचिव कार्यालय से यह शिकायत खनिज संसाधन विभाग को भेजी गई, जहां से आगे जांच के लिए इसे बिलासपुर संभाग आयुक्त कार्यालय भेजा गया। लेकिन आरोप है कि संभाग आयुक्त कार्यालय में यह शिकायत कई महीनों तक फाइलों में दबाकर रखी गई और किसी भी स्तर पर ठोस जांच शुरू नहीं की गई।
जांच से बचने की कोशिश, जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाली गई
जब शिकायतकर्ता ने संभाग आयुक्त कार्यालय से पत्राचार किया, तब शिकायत को जांच के लिए कोरबा कलेक्टर कार्यालय भेज दिया गया। इसके बावजूद डीएमएफ फंड के दुरुपयोग और कुप्रबंधन की कोई जांच शुरू नहीं हुई। कई माह तक इंतजार के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो शिकायतकर्ता ने एक बार फिर कोयला मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन तब भी प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी बनी रही।
उच्च न्यायालय की शरण में पहुँचा मामला
प्रशासनिक उदासीनता से निराश होकर याचिकाकर्ता ने बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने न्यायालय के समक्ष डीएमएफ फंड के दुरुपयोग से संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों को विस्तार से रखा।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि यह शिकायत खनन मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव द्वारा 20 नवंबर 2024 को राज्य शासन तक भेजी गई थी। इसके बाद बिलासपुर संभाग आयुक्त ने कोरबा जिला प्रशासन को जांच के निर्देश दिए थे।
न्यायालय के दबाव में बनी तीन सदस्यीय समिति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता को 14 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे कोरबा स्थित खनिज न्यास कार्यालय में उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि डीएमएफ से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए संभाग आयुक्त द्वारा तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
अब टिकी हैं निगाहें जांच रिपोर्ट पर
उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद शुरू हुई इस जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि डीएमएफ फंड के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही की सच्चाई सामने आएगी। यह भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर क्या कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है।
कोरबा जिले में वर्षों से डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर उठते सवालों के बीच यह जांच प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की असली परीक्षा मानी जा रही है।





