प्रशासनिक लापरवाही ने किसानों को आत्मघाती कदम के लिए किया मजबूर: भूमि विवादों पर तत्काल विशेष काउंटर खोलने की मांग






कोरबा में जहर पीकर जान देने की दो घटनाओं ने उजागर की सिस्टम की संवेदनहीनता
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**कोरबा जिले में लगातार दूसरी बार किसान द्वारा जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास किया जाना न केवल अत्यंत दुर्भाग्यजनक है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता और भूमि संबंधी अव्यवस्थाओं का गंभीर परिणाम भी है। किसानों की इस दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नगर पालिक निगम कोरबा के सभापति नूतनसिंह ठाकुर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3100 रुपये करने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। लेकिन नीतियों का लाभ जमीन पर नहीं उतर पा रहा, क्योंकि निचले स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रही है। परिणामस्वरूप किसान मानसिक दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
आदिवासी बहुल जिले में भूमि विवादों का अंबार
नूतनसिंह ठाकुर ने कहा कि आदिवासी बहुल कोरबा जिले में नामांतरण, बंटवारा और रिकॉर्ड दुरुस्ती से जुड़े सैकड़ों मामले वर्षों से तहसील न्यायालयों में लंबित हैं। न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र, बल्कि शहरी इलाकों में भी आम नागरिक अपने ही जमीन से जुड़े विवादों में उलझकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
धान खरीदी के इस महत्वपूर्ण मौसम में रकबा कम होने जैसी गंभीर त्रुटियों के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।
हर तहसील में सुविधा केंद्र खोलने की मांग
नगर निगम सभापति ने जिला कलेक्टर कोरबा से मांग की है कि—
सभी तहसीलों में भूमि विवाद निपटारे के लिए विशेष सुविधा केंद्र (स्पेशल काउंटर) तत्काल शुरू किए जाएं
नामांतरण, रिकॉर्ड दुरुस्ती और बंटवारे के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
किसानों को महीनों और वर्षों तक भटकने से राहत दी जाए
उन्होंने कहा कि जब तक जमीन से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होगा, तब तक किसान लगातार मानसिक और आर्थिक संकट में घिरा रहेगा।
जहर पीने की घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग
नूतनसिंह ठाकुर ने कोरबा में जहर पीकर जान देने की कोशिश के दोनों मामलों की जिला कलेक्टर स्तर से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई किसान इस तरह का कदम उठाने को मजबूर न हो।
“किसानों की पीड़ा को नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त नहीं”
उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता है और उसकी समस्याओं को अनदेखा करना नैतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर अपराध है। अब समय आ गया है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए और जमीन से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान कर किसानों को राहत पहुंचाए।
— नूतनसिंह ठाकुर
सभापति, नगर पालिक निगम कोरबा





