July 25, 2026

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कोरबा: राखड़ डंप के कारण किसानों की धान फसल बर्बाद, कलेक्टर से शिकायत कर न्याय की माँग करेगी उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ कोरबा, 7 सितम्बर 2025। कोरबा-पश्चिम गेवरा-पेंड्रा रेल मार्ग के निर्माण कार्य के तहत गेवरा स्टेशन के पास ग्राम भैरोताल और कुचेना के समीप पिछले एक साल से रेलवे पथ निर्माण कार्य चल रहा है। इस कार्य में समतलीकरण हेतु बिजली संयंत्रों से निकली राखड़ का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। लेकिन भारी बरसात के कारण यह राखड़ खेतों में घुस गया और दर्जनों एकड़ में बसी धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई।
विशेष रूप से एनटीपीसी-दीपका रेल लाइन के किनारे बांकी-कुसमुंडा सड़क मार्ग के मध्य स्थित कई किसानों की फसलें राखड़ से पट जाने के कारण नष्ट हो चुकी हैं। स्थानीय किसान अपने खेतों की सुरक्षा के लिए हजारों रुपये खर्च कर फेंसिंग भी करवा चुके हैं, फिर भी यह समस्या बढ़ती जा रही है।
इस गंभीर मामले पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया, जिससे किसानों के सामने दिन-ब-दिन संकट गहराता जा रहा है। वहीं, भू-अर्जन के मामले में भी किसानों को अनुचित मुआवजा देने का आरोप लगाया गया है। भू-अर्जन 2013 अधिनियम के अनुसार निगम क्षेत्र की भूमि का मुआवजा वर्ग फिट के हिसाब से होना चाहिए था, जबकि राजस्व विभाग ने डिसमिल दर से मुआवजा निर्धारण कर दिया। इससे हर किसान को लाखों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन के अध्यक्ष श्री सपुरन कुलदीप ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यवाही की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह गंभीर अनदेखी किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि संगठन जल्द ही जिला कलेक्टर से शिकायत करेगा और उच्च न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराएगा। साथ ही आवश्यकतानुसार आंदोलन भी किया जाएगा ताकि किसानों के हक की लड़ाई आगे बढ़ाई जा सके।
🌾 न्याय की अपील
किसानों का कहना है कि वे अपनी मेहनत और फसल के माध्यम से देश की कृषि व्यवस्था को सशक्त बना रहे हैं। लेकिन निर्माण कंपनियों द्वारा बिना सोच-समझ के राखड़ डंप करना उनके जीवन-निर्वाह पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। यह मामला केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न बन चुका है।
👉🏻 उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन एवं स्थानीय किसान पूरे प्रदेश प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि राखड़ डंपिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए तथा भविष्य में ऐसी अनियमितता की पुनरावृत्ति रोकी जाए।

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