August 17, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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रायगढ़ का सबसे बड़ा भूमि घोटाला: बजरमुड़ा कांड में 400 करोड़ की लूट, लेकिन असली गुनहगार अब भी आज़ाद!

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 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हुए प्रदेश के सबसे बड़े भूमि घोटाले – बजरमुड़ा कांड ने प्रशासन को हिला कर रख दिया है। 400 करोड़ से अधिक की इस लूट में सरकारी अफसरों और दलालों की गहरी साठगांठ सामने आई है। घोटाले की जांच रिपोर्ट में बड़े नामों का खुलासा होने के बाद सरकारी मशीनरी में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, आठ अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता तय हो चुकी है, और उनके खिलाफ नोटशीट तैयार की जा रही है।

कैसे हुआ 400 करोड़ का घोटाला?

छत्तीसगढ़ सरकार की कंपनी सीएसपीजीसीएल को गारे पेलमा सेक्टर-3 कोल ब्लॉक के लिए 449.166 हेक्टेयर भूमि लीज पर दी गई थी। इसका अधिग्रहण कर प्रभावितों को मुआवजा देने का जिम्मा एसडीएम घरघोड़ा अशोक मार्बल को सौंपा गया। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया, जिसमें सिर्फ बजरमुड़ा गांव की 170 हेक्टेयर भूमि के लिए 478.68 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया, जिसे बाद में घटाकर 415.69 करोड़ रुपये कर दिया गया।

घोटाले के फर्जीवाड़े:

असिंचित भूमि को सिंचित बताया गया।
पेड़ों की संख्या बढ़ाकर बताई गई।
टिन शेड को पक्का निर्माण दिखाया गया।
कृत्रिम परिसंपत्तियों का मनमाना आकलन किया गया।
20 लाख की भूमि के बदले 20 करोड़ का मुआवजा बांटा गया।

जांच में क्या सामने आया?

जांच रिपोर्ट में कई बड़े नाम उजागर हो चुके हैं, लेकिन अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। पटवारी जितेंद्र पन्ना और मालिकराम राठिया को निलंबित कर दिया गया, लेकिन तहसीलदारों और अन्य अधिकारियों की भूमिका की पुष्टि होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं हुई।

रेलवे और महाजेंको के प्रोजेक्ट भी निशाने पर?

रायगढ़ के तमनार और घरघोड़ा में भू-अर्जन घोटालों का एक शक्तिशाली गिरोह सक्रिय है, जिसमें भूमाफिया, अफसर और रसूखदार लोग शामिल हैं। अब यही खेल रेलवे और महाजेंको के प्रोजेक्ट्स में भी दोहराया जा रहा है।

टिन शेड को पक्का निर्माण बताकर भारी मुआवजा लिया गया।
पोल्ट्री फार्म दिखाकर करोड़ों का फर्जी भुगतान कराया गया, जबकि साइट पर कोई मुर्गा तक नहीं था।
बिजली कनेक्शन न होने के बावजूद टिन शेड्स को ‘पावर सप्लाई’ वाला दिखाया गया।

इस घोटाले की शिकायत इरकॉन ने की थी, लेकिन इसे भी दबाने का प्रयास किया गया। यह साफ दर्शाता है कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था इस लूट में शामिल है।

अब क्या होगा?

बजरमुड़ा घोटाले के खुलासे के बावजूद सरकारी मशीनरी खामोश बनी हुई है। सवाल उठता है कि क्या सरकार भ्रष्ट अफसरों पर सख्त कार्रवाई करेगी या उन्हें बचाने के लिए कोई नया तरीका खोजा जाएगा?

जनता की नज़रें इस घोटाले पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार की दलदल में फंसा हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या रायगढ़ के इस सबसे बड़े भूमि घोटाले के असली गुनहगार कानून की गिरफ्त में आएंगे, या फिर हमेशा की तरह सच्चाई को दबा दिया जाएगा?

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