February 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

*पुराना इतिहास याद रखें -*
*जिसे समर्थन दिया, उसकी ही जड़े काट दी -*

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा संजय    कल शरद पवार आ गए हरिकिशन सिंह सुरजीत की भूमिका में और इंडी गठबंधन के दलाल बन कर नायडू और नीतीश कुमार को पटाने निकल पड़े जबकि उन दोनों के भी समर्थन से भी इंडी का 233 का आंकड़ा बहुमत नहीं बनाता – नीतीश कुमार पर कुछ लोग दाव लगा रहे थे कि वो फिर पलटी मार सकते हैं और नायडू को भी लालच आ सकता है –

अब वैसे दोनों ने मामला साफ़ कर दिया है लेकिन किसी को कांग्रेस के झांसे में आने से पहले 10 बार सोचना चाहिए क्योंकि यह “झांसा पार्टी” है दाना डाल कर चारा बना कर खा जाती है – इस कांग्रेस के कई किस्से याद कराता हूं –

किस्सा No 1 – चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई, 1979 को इंदिरा गांधी के समर्थन से प्रधानमंत्री बने और विश्वास मत के पहले इंदिरा गांधी नई शर्त रख दी कि उसके और संजय गांधी के खिलाफ सब केस वापस लिए जाएं – चरण सिंह ने मना कर दिया और उन्हें 22 दिन बाद 20 अगस्त, 1979 को त्यागपत्र देना पड़ा;

किस्सा No 2 – चंद्रशेखर को कांग्रेस ने समर्थन देकर 10 नवंबर , 1990 को प्रधानमंत्री बनाया और एक फालतू विवाद खड़ा कर दिया कांग्रेस ने – एक आरोप 2 मार्च, 1991 को लगाया गया कि राजीव गांधी की जासूसी की गई है और कांग्रेस ने बजट की परवाह किए बिना 6 मार्च को समर्थन वापस ले लिया – चंद्रशेखर को 21 मार्च, 1991 को त्यागपत्र देना पड़ा;

किस्सा No 3 – अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार गिरने के बाद HD Deve गौड़ा 1 जून, 1996 को प्रधानमंत्री बने – उनकी सरकार को 13 दलों का समर्थन प्राप्त था – गौड़ा को 11 अप्रैल, 1997 को विश्वास मत प्राप्त करना था मगर वो कर नहीं सके क्योंकि कांग्रेस ने सीताराम केसरी की अध्यक्षता में गौड़ा से समर्थन वापस ले लिया – बहाना था केसरी की नाराजगी कि गौड़ा उनसे मिलने नहीं जाते, उनका आदर नहीं करते – गौड़ा ने त्यागपत्र दे दिया और फिर –

किस्सा No 4 – 10 दिन बाद कांग्रेस ने फिर खिचड़ी सरकार का गठन करा दिया और इस बार प्रधानमंत्री बने 21 अप्रैल, 1997 को इंद्र कुमार गुजराल जिन्हें 6 महीने बाद कांग्रेस ने बाहर का रास्ता दिखा दिया – क्या हुआ था :- 28 अगस्त, 1997 राजीव गांधी की हत्या से जुड़ी जैन आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौपी गई जो 16 नवंबर 1997 को लीक हो गई – उस रिपोर्ट में DMK के लोगों पर राजीव की हत्या में शामिल होने के आरोप थे – कांग्रेस ने गुजराल से सभी DMK के मंत्री हटाने को कहा और जब गुजराल ने मना कर दिया तो 28 नवंबर 1997 को गुजराल से भी समर्थन वापस ले लिया – अब वही DMK कांग्रेस की सहयोगी है राजनीति के लिए भी और सनातन को ख़त्म करने के लिए भी – राजीव के हत्यारों को भी गांधी परिवार माफ़ी दे चुका है –

ये अब किसी को प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश कर दें, और बना भी दें, लेकिन दो महीने में उसे पटक देंगे –

इसलिए सावधानी में ही बचाव है –

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