कोरबा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी संयुक्त रूप से लड़ेगी चुनाव




कोरबा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आसन्न विधानसभा चुनाव में कोरबा और कटघोरा विधानसभा सीट पर संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कोरबा क्षेत्र से सुनील सिंह को और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कटघोरा से जवाहर सिंह कंवर को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है।
इसी तारतम्य में, मंगलवार को पार्टी पदाधिकारियों/कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में संयुक्त रुप से आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कोरबा और कटघोरा क्षेत्र में मिलजुल कर बड़े पैमाने पर प्रचार करने की घोषणा की है।
जारी किए गए संयुक्त बयान में माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा और भाकपा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने उक्ताशय की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि दोनों प्रत्याशी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी है, इसलिए दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता उनकी जीत को सुनिश्चित करने के लिए मिलजुल कर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही पार्टियों की सरकारें रही हैं लेकिन उनकी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के कारण विनिवेशीकरण और निजीकरण की नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। जिसके कारण छत्तीसगढ़ में आम जनता, विशेषकर असंगठित मजदूरों की बदहाली बढ़ रही है। यही कारण है कि आज प्रदेश में नियमित मजदूरों से ज्यादा संख्या ठेका मजदूर, संविदा कर्मचारी, दैनिक वेतन भोगियों एवं अनियमित कर्मचारियों की है, जिनका भरपूर शोषण किया जा रहा है। इनके पास रोजगार की कोई सुरक्षा गारंटी भी नहीं है।
वामपंथी नेता द्वय ने कहा कि जिले में अंधाधुंध हो रहे औद्योगीकरण के कारण बड़े पैमाने पर गरीबों का विस्थापन हो रहा है, लेकिन उनके पुनर्वास की चिंता से दोनों पार्टियों का कोई सरोकार नहीं रहा है। इस वजह से एसईसीएल जैसे सार्वजनिक उपक्रम भी अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने से इनकार इंकार कर रहे हैं। यही नहीं वे भू-विस्थापितों को उनकी जमीन लौटाने और पुनर्वास भूमि का पट्टा देने से भी इंकार कर रहे हैं। आदिवासी वन अधिकार कानून और पेसा कानून को अब तक लागू ही नहीं किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि कोरबा और कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी का राजनैतिक और नीतिगत विकल्प भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ही है, जिसने किसान सभा, सीटू, एटक के साथ मिलकर आम जनता की समस्याओं को हल करने के लिए ईमानदारी से संघर्ष किया है। इन संघर्षों के कारण ही आज क्षेत्र की आम जनता बदलाव के मूड में है। भाकपा और माकपा द्वारा दोनों विधानसभा क्षेत्र में किए जाने वाले संयुक्त चुनाव प्रचार से न केवल क्षेत्र में एक राजनैतिक शक्ति उभरेगा बल्कि राज्य विधानसभा में प्रदेश के लिए ‘तीसरा विकल्प’ का दरवाजा भी खुलेगा।


