November 4, 2026

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SIR में बड़ी राहत: पहले से पंजीकृत रहे नागरिकों को भी मिलेगा दोबारा नाम जुड़वाने का मौका, फॉर्म भरने पर नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//कोरबा,4 नवंबर 2026 विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम नहीं पाने वाले नागरिकों के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। अब ऐसे नागरिक, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन वर्तमान प्रारूप सूची से किसी कारणवश छूट गया है, वे भी बिना किसी डर और संकोच के फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि पूर्व में मतदाता रहे किसी व्यक्ति द्वारा वर्तमान सूची में नाम नहीं होने की स्थिति में फॉर्म-6 जमा करना गलत घोषणा नहीं माना जाएगा और न ही इस आधार पर उसके विरुद्ध कोई कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

फॉर्म-6 भरने को लेकर दूर हुई सबसे बड़ी उलझन

दरअसल, SIR प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे नागरिक सामने आए, जो पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, लेकिन नई प्रारूप मतदाता सूची में उनका नाम शामिल नहीं था। ऐसे मतदाताओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि फॉर्म-6 में पहली बार नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा करनी होती है, जबकि वे पहले ही मतदाता रह चुके हैं। उन्हें आशंका थी कि फॉर्म-6 भरने पर उनकी घोषणा गलत मानी जा सकती है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

भारत निर्वाचन आयोग ने इसी भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 प्रस्तुत करना होगा। वह पूर्व में मतदाता रहा हो, तब भी केवल इसी आधार पर उसकी घोषणा को झूठा या गलत नहीं माना जाएगा।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप आयोग का स्पष्टीकरण

इस संबंध में आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2026 के निर्णय का भी संदर्भ दिया है। याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026 (निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य) में न्यायालय ने इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की थी। आयोग का वर्तमान स्पष्टीकरण भी इसी न्यायिक दृष्टिकोण के अनुरूप है। इससे उन हजारों मतदाताओं की आशंका दूर करने में मदद मिलेगी, जो कानूनी कार्रवाई के डर से आवेदन करने से बच रहे थे।

ERO अधिकारियों को भी दिए गए स्पष्ट निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देशित किया है कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाए कि उसका नाम पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था। हालांकि, आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत न हो तथा आवेदन निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो।

मतदाता क्या करें? नाम नहीं है तो ऐसे कराएं पंजीकरण

निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद मतदाताओं के लिए प्रक्रिया और आसान हो गई है। जिन नागरिकों का नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें सबसे पहले अपनी वर्तमान मतदाता सूची में नाम की स्थिति जांचनी चाहिए। नाम नहीं मिलने पर फॉर्म-6 भरकर संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के साथ निर्धारित आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। आवेदन की जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की नागरिकों से अपील

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांचें। यदि नाम सूची से छूट गया है तो किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम में न रहें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर फॉर्म-6 भरकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।

निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन पूर्व मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है, जो तकनीकी और कानूनी उलझन के कारण दोबारा आवेदन करने से हिचक रहे थे। अब स्पष्ट है कि प्रारूप सूची में नाम नहीं होने पर पात्र नागरिक को दोबारा पंजीकरण का अवसर मिलेगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक की मतदाता सूची में भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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