नेशनल हेराल्ड मामले की सुनवाई से ठीक पहले कांग्रेस का दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन! आखिर 10 लाख की भीड़ जुटाने की इतनी बेचैनी क्यों?
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सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े मामले की 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई, उससे एक दिन पहले 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की महारैली; कोरबा से भी कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाए जाने पर उठे सवाल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। कांग्रेस की राजनीति, दिल्ली की महारैली और नेशनल हेराल्ड मामले की आगामी सुनवाई ने एक बार फिर देश की सियासत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के विरोध में बड़ी रैली आयोजित करने जा रही है, तो दूसरी ओर 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े नेशनल हेराल्ड मामले की सुनवाई निर्धारित है। इन दोनों घटनाओं के बीच एक दिन का अंतर होने से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस रैली के माध्यम से वास्तव में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को ही प्रमुखता देना चाहती है, या फिर इस बड़े आयोजन के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन भी करना चाहती है?
10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य, देशभर से कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलावा
कांग्रेस ने इस रैली में लगभग 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए देश के अलग-अलग राज्यों से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली पहुंचने के लिए कहा गया है। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाए जाने और उनके रैली में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
सवाल यह भी है कि जब देश और प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, स्थानीय विकास, किसानों और आम जनता से जुड़े अनेक मुद्दे मौजूद हैं, तब इतनी बड़ी संख्या में लोगों को दिल्ली ले जाकर रैली करने से आम नागरिकों को क्या ठोस लाभ मिलेगा? क्या इन मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर भी उतनी ही गंभीरता से आंदोलन किया जा रहा है?
2 नवंबर की सुनवाई पर देश की निगाहें
नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य संबंधित पक्षों के विरुद्ध वित्तीय लेनदेन तथा कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को संबंधित पक्षों ने खारिज किया है।
मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि 16 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत ने ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ED ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। 12 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर निर्धारित की। अदालत ने अभी आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
ऐसे में 1 नवंबर की रैली और 2 नवंबर की सुनवाई के बीच की समय-समीपता ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, रैली का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करना है, ऐसा साबित करने वाला कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
कोरबा से दिल्ली तक राजनीति, लेकिन जनता के सवाल अपनी जगह
कोरबा जिले से भी लोगों को इस रैली में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिले के कार्यकर्ताओं की भागीदारी का उद्देश्य क्या है और इस आयोजन से कोरबा के स्थानीय मुद्दों को कितनी जगह मिलेगी?
क्या कांग्रेस के नेता कोरबा की जनता के सामने भी स्थानीय समस्याओं पर अपनी स्पष्ट कार्ययोजना रखेंगे? क्या जिले के बेरोजगार युवाओं, औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित लोगों, सड़कों, पानी और नागरिक सुविधाओं के सवालों पर भी इसी तरह बड़े स्तर पर आवाज उठाई जाएगी?
राजनीतिक प्रदर्शन से आगे जवाबदेही भी जरूरी
लोकतंत्र में रैली करना हर राजनीतिक दल का अधिकार है। लेकिन किसी भी राजनीतिक दल से सवाल पूछना भी जनता का अधिकार है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप हों या नेशनल हेराल्ड मामले में कानूनी कार्यवाही, दोनों विषयों पर तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर बात होनी चाहिए।
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस अपनी भीड़ और राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेगी, जबकि 2 नवंबर को अदालत में नेशनल हेराल्ड मामले की सुनवाई होगी। अब देश की निगाहें इन दोनों घटनाक्रमों पर रहेंगी।
सवाल केवल यह नहीं कि दिल्ली में कितने लाख लोग जुटेंगे, बल्कि यह भी है कि राजनीतिक दल जनता के असल सवालों का जवाब कब देंगे और अपने दावों को प्रमाणों के साथ कब साबित करेंगे।
